यूपी मदरसा शिक्षकों पर 'जबरन VRS' का विवाद गहराया: NHRC ने अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक को किया तलब, मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप

Controversy Over 'Forced VRS' for UP Madrasa Teachers Deepens: NHRC Summons Director of Minority Welfare Amid Allegations of Human Rights Violations
 
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संजय सक्सेना, लखनऊ | 18 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश के अशासकीय मदरसों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को 'जबरन वीआरएस' (VRS) दिए जाने का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ चुका है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक को समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद की जड़ उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी और फारसी मदरसा मान्यता प्रशासन एवं सेवा नियमावली-2016 है। इस नियमावली में शिक्षकों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद, प्रदेश के कई जिलों में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों ने शिक्षकों के इस्तीफों को VRS मानकर उनकी पेंशन स्वीकृत कर दी।

मुख्य बिंदु:

  • नियमों का उल्लंघन: नियमावली के अनुसार, कर्मचारी केवल 3 महीने का नोटिस देकर इस्तीफा दे सकता है, लेकिन उसे VRS जैसी वित्तीय सुविधा नहीं दी जा सकती।

  • वित्तीय अनियमितता: बिना कानूनी आधार के पेंशन वितरण से सरकारी खजाने को भारी वित्तीय घाटा होने की आशंका है।

  • दबाव की शिकायतें: आरोप है कि कई शिक्षकों पर दबाव बनाकर उनसे त्यागपत्र लिया गया और बाद में उसे पेंशन का लालच देकर VRS के रूप में प्रोसेस किया गया।

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NHRC की कार्रवाई और समन

मामला 15 अप्रैल 2026 को उस समय चर्चा में आया जब NHRC ने एक शिकायत पर संज्ञान लिया। आयोग ने विभाग द्वारा पूर्व में दिए गए जवाबों पर असंतोष व्यक्त किया है।

  • निदेशक तलब: अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक को 14 मई 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट के साथ आयोग के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया गया है।

  • मानवाधिकार उल्लंघन: शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि शिक्षकों को उनकी मर्जी के खिलाफ नौकरी से वंचित करना सीधे तौर पर मानवाधिकारों का हनन है।

प्रशासनिक लापरवाही या सोची-समझी रणनीति?

जानकारों का मानना है कि जिला स्तर के अधिकारी बिना किसी उच्च विभागीय मौन सहमति के इतने बड़े पैमाने पर पेंशन स्वीकृत नहीं कर सकते।

  • दिसंबर 2025 में खुला मामला: जब निदेशालय ने सभी जिलों से सेवानिवृत्ति का ब्योरा मांगा, तब इस बड़ी अनियमितता का खुलासा हुआ।

  • राजनीतिक जुड़ाव: विपक्ष का आरोप है कि योगी सरकार मदरसों से पुराने समर्थकों को हटाने के लिए यह रास्ता अपना रही है। हालांकि, इसे वर्तमान सरकार के 'मदरसा सुधार और आधुनिकीकरण' एजेंडे से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

हजारों शिक्षकों के भविष्य पर संकट

इस विवाद ने उत्तर प्रदेश के लगभग 1.5 लाख मदरसा शिक्षकों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।

  • रिकवरी का डर: जिन शिक्षकों को VRS का लाभ मिल चुका है, अब उन्हें सरकार द्वारा रिकवरी (धनवापसी) किए जाने का डर सता रहा है।

  • अल्पसंख्यक समुदाय में रोष: केंद्र और राज्य स्तर पर मदरसा बोर्डों को लेकर चल रही कानूनी बहसों के बीच इस नए विवाद ने समुदाय में असंतोष बढ़ा दिया है।

यह विवाद योगी सरकार द्वारा अखिलेश यादव सरकार के 'मदरसा शिक्षक सुरक्षा विधेयक' को रद्द करने के बाद और अधिक गंभीर हो गया है। अब विभाग के पास दो ही रास्ते हैं—या तो वे नियमावली में संशोधन कर इस लाभ को कानूनी रूप दें, या फिर अवैध रूप से दी गई पेंशन की रिकवरी शुरू करें। दोनों ही स्थितियों में प्रशासनिक चुनौतियाँ बढ़ना तय है।

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