फ्रांस में सरकार के खिलाफ उबाल, कई शहरों में प्रदर्शन और हिंसा; 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात, मैक्रों की अपील के बावजूद जारी तनाव
पेरिस। फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था, महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन व्यापक आंदोलन का रूप ले चुका है। छात्र-छात्राओं से शुरू हुआ यह आंदोलन अब कर्मचारियों, शिक्षकों और श्रमिक संगठनों तक पहुंच गया है। राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए हैं। कुछ स्थानों पर आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं। हालात को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने देशभर में करीब 70 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की है।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और सरकार की ओर से तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी शिक्षा, वेतन और जीवनयापन की बढ़ती लागत से जुड़ी समस्याओं पर ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, प्रदर्शनकारी संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने 31 अक्टूबर को फिर से प्रदर्शन और 5 नवंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।
कई शहरों में पुलिस की कार्रवाई, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
फ्रांस में हिंसा की आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था सख्त की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, 24 अक्टूबर को देशभर में लगभग 70 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। सुरक्षा बलों को हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहनों और अन्य संसाधनों की मदद भी दी गई। कुछ शहरों में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।
पिछले सप्ताह हुए प्रदर्शनों के दौरान दुकानों में लूटपाट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के बाद प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। वहीं, कुछ शहरों में प्रदर्शन पर प्रतिबंध और रूट संबंधी पाबंदियों को लेकर छात्र संगठनों तथा ट्रेड यूनियनों ने आपत्ति जताई है।
स्कूलों में शिक्षकों की कमी से शुरू हुआ आंदोलन
इस आंदोलन की शुरुआत स्कूलों में शिक्षकों की कमी, कक्षाओं में बढ़ती भीड़ और जर्जर शैक्षणिक सुविधाओं के विरोध से हुई थी। धीरे-धीरे इसमें विश्वविद्यालयों में प्रवेश व्यवस्था, शिक्षा के लिए अधिक संसाधन, वेतन, पेंशन और बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए।
प्रदर्शनकारी बेहतर शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की नियुक्ति, स्कूलों और विश्वविद्यालयों की इमारतों के नवीनीकरण तथा उच्च शिक्षा में अधिक सीटें उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
छात्रों की 10 सूत्रीय मांगों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर जोर
छात्र संगठनों की मांगों में विश्वविद्यालय प्रवेश प्रणाली Parcoursup में बदलाव, उच्च शिक्षा में सीटों की संख्या बढ़ाना और शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों की इमारतों की मरम्मत और शिक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है।
प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार की ओर से किए जा रहे वादे पर्याप्त नहीं हैं। उनका जोर इस बात पर है कि शिक्षा से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध और ठोस कदम उठाए जाएं।
मैक्रों ने लोगों से एकजुटता और शांति बनाए रखने की अपील की
बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने लोगों से शांति बनाए रखने और समाज में विभाजन पैदा करने वाली गतिविधियों से दूर रहने की अपील की है। सरकार का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की जायज मांगों और हिंसा, लूटपाट तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं के बीच अंतर किया जाना चाहिए।
हालांकि, छात्र संगठनों और श्रमिक समूहों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान केवल बातचीत और आश्वासनों से नहीं होगा। वे शिक्षा, रोजगार और जीवनयापन की लागत से जुड़े मुद्दों पर ठोस फैसले चाहते हैं।
सरकार के सामने चुनौती बरकरार
फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शन सरकार के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। एक ओर प्रशासन हिंसा और तोड़फोड़ रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर दबाव बनाए रखने की तैयारी कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच बातचीत तथा प्रस्तावित प्रदर्शनों पर सबकी नजर रहेगी। स्थिति का अगला रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था, वेतन और महंगाई से जुड़े मुद्दों पर क्या कदम उठाती है।
