मिट्टी से मैट तक पहुंचा खो-खो, अब बाराबंकी से निकलेगी अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा
एसोसिएशन का कहना है कि खो-खो अब केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित खेल नहीं रह गया है। इसकी पेशेवर लीग, आधुनिक खेल संरचना और प्रसारण व्यवस्था विकसित होने से इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। देश में अब तक 3,500 से अधिक खिलाड़ियों को खेल कोटे के माध्यम से सरकारी नौकरी और विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिलने का भी दावा किया गया है।
1914 में शुरू हुआ खेल का औपचारिक विकास
एसोसिएशन के मुताबिक खो-खो की जड़ें भारत की पारंपरिक खेल संस्कृति में गहरी हैं। वर्ष 1914 में पुणे के डेक्कन जिमखाना में इसके औपचारिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई। इसके बाद 1935 में खेल के नियम प्रकाशित किए गए। वर्ष 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भी खो-खो का प्रदर्शन किया गया था।
2025 वर्ल्ड कप ने बदली खेल की तस्वीर
खो-खो के अंतरराष्ट्रीय विस्तार में 2025 में भारत में आयोजित पहले खो-खो वर्ल्ड कप को महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। प्रतियोगिता में अमेरिका, अर्जेंटीना, पेरू, घाना, जर्मनी, ईरान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और ब्राजील सहित कई देशों की टीमों ने हिस्सा लिया।एसोसिएशन के अनुसार वर्ल्ड कप ने यह संदेश दिया कि खो-खो अब भारतीय सीमाओं से बाहर भी अपनी जगह बना रहा है और अलग-अलग देशों के खिलाड़ी इसे अपनाने लगे हैं।
प्रोफेशनल लीग से बढ़ी लोकप्रियता
खो-खो को आधुनिक और पेशेवर खेल के रूप में स्थापित करने में अल्टीमेट खो-खो लीग (UKK) की भी महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है। प्रोफेशनल लीग के जरिए खेल को नई प्रस्तुति, बेहतर प्रसारण और प्रतिस्पर्धात्मक ढांचा मिला है। इसी मॉडल को आगे जिला और राज्य स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।एसोसिएशन ने ऑस्ट्रेलिया में खो-खो के लिए विकसित किए गए इनडोर खेल ढांचे का भी उल्लेख किया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल के लिए लगातार नई संभावनाएं बन रही हैं।
2030 तक एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ, 2032 तक ओलंपिक का लक्ष्य
खो-खो को अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर और मजबूत करने के लिए 2030 तक कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स तथा 2032 तक ओलंपिक में शामिल कराने की दिशा में प्रयासों का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान में महिला खिलाड़ियों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बाराबंकी में जिला से ग्रामीण स्तर तक बनेगी रणनीति
बाराबंकी खो-खो स्पोर्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन अब जिले की प्रतिभाओं को तलाशने और उन्हें बेहतर मंच उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। एसोसिएशन के निर्देश पर जिला स्तर के साथ-साथ ब्लॉक और ग्रामीण स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित करने की योजना है।
होनहार खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास, आवश्यक खेल सुविधाएं, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा। उद्देश्य है कि स्थानीय प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से ही व्यवस्थित प्रशिक्षण देकर उन्हें राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाए।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि खो-खो युवाओं में फिटनेस, दौड़ने की क्षमता, गति और सहनशक्ति विकसित करने वाला खेल है। वजन को नियंत्रित रखने और शारीरिक सक्रियता बढ़ाने में भी यह उपयोगी है। एसोसिएशन का लक्ष्य है कि बाराबंकी के खिलाड़ियों को बेहतर अवसर देकर ऐसी प्रतिभाएं तैयार की जाएं, जो आने वाले समय में राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले और देश का नाम रोशन करें।
