अर्ली इंटरवेंशन से विशेष विद्यालयों तक, दिव्यांगजनों के लिए बहुआयामी सहायता व्यवस्था
सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के संकल्प के साथ दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बना रही योगी सरकार
शिक्षा, कौशल और रोजगार में समान अवसर देना सरकार की प्राथमिकता
लखनऊ, 7 जनवरी 2026। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के सर्वांगीण पुनर्वासन को नई दिशा और गति देने के लिए व्यापक पहल शुरू की है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि दिव्यांगजन शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और रोजगार के प्रत्येक क्षेत्र में समान अवसर प्राप्त कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ते हुए आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा “दिव्यांगजन के सर्वांगीण पुनर्वासन हेतु स्वैच्छिक संस्थाओं को सहायता योजना” लागू की गई है, जिसके अंतर्गत पात्र स्वैच्छिक संस्थाओं को अनुदान प्रदान किया जाएगा।
21 प्रकार की दिव्यांगताओं के लिए सहायता
इस योजना के तहत दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में परिभाषित 21 प्रकार की दिव्यांगताओं से प्रभावित व्यक्तियों के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। हालांकि, मानसिक मंदित एवं मानसिक रूप से रुग्ण दिव्यांगजन इस योजना के दायरे से बाहर रखे गए हैं। योजना का उद्देश्य विभिन्न श्रेणियों के दिव्यांग बच्चों और युवाओं के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप, शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
राज्य मंत्री नरेन्द्र कश्यप का बयान
प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि योगी सरकार की प्राथमिकता है कि दिव्यांगजन शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें।
उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से सरकार अनुभवी स्वैच्छिक संस्थाओं की सहभागिता को बढ़ावा दे रही है, जिससे दिव्यांग बच्चों और युवाओं को प्रारंभिक हस्तक्षेप, शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास की प्रभावी सुविधाएं मिल सकें।
किन गतिविधियों को मिलेगा अनुदान
योजना के अंतर्गत निम्नलिखित कार्यों को सहायता अनुदान प्रदान किया जाएगा—
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अर्ली इंटरवेंशन सेंटरों की स्थापना
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डे-केयर सेंटर एवं प्री-प्राइमरी विद्यालयों का संचालन
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प्राथमिक से हाईस्कूल स्तर तक विशेष विद्यालय
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दिव्यांगजनों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम
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पाठ्य सामग्री, ब्रेल लिपि एवं सहायक उपकरणों की उपलब्धता
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दिव्यांगजनों से संबंधित पुस्तकालयों का संचालन
इन प्रयासों का उद्देश्य दिव्यांगजनों की प्रारंभिक अवस्था से पहचान कर उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।
पात्रता और चयन प्रक्रिया
मंत्री कश्यप ने बताया कि योजना के अंतर्गत केवल वही स्वैच्छिक संस्थाएं पात्र होंगी—
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जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत पंजीकृत हों
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नीति आयोग के एनजीओ दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण एवं विशिष्ट पहचान संख्या रखती हों
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जिनके पास दिव्यांगजनों के क्षेत्र में कम से कम दो वर्षों का अनुभव हो
प्रस्तावों का परीक्षण जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा किया जाएगा, जबकि अंतिम निर्णय निदेशालय स्तर की स्क्रीनिंग कमेटी लेगी, जिससे पारदर्शिता और परिणामोन्मुखी उपयोग सुनिश्चित हो सके।
व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश
राज्य मंत्री ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जनपदों में योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कराएं, ताकि अधिक से अधिक स्वैच्छिक संस्थाएं इस अभियान से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के संकल्प के साथ दिव्यांगजनों को सशक्त, शिक्षित और स्वावलंबी बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।
