सत्यमेव जयते से पीके तक: आमिर खान की छवि और वास्तविक जीवन पर सवाल

मनोज कुमार अग्रवाल (विनायक फीचर्स) द्वारा लिखित यह आलेख बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के सार्वजनिक बयानों, फिल्मों के दृश्यों, राजनीतिक मुलाकातों और उनके निजी जीवन के घटनाक्रमों की समीक्षा करते हुए उन पर वैचारिक विरोधाभास (दोहरे मापदंड) का आरोप लगाता है।
 
सत्यमेव जयते से पीके तक: आमिर खान की छवि और वास्तविक जीवन पर सवाल
मनोज कुमार अग्रवाल (विनायक फीचर्स)  आलेख में आमिर खान के रील लाइफ (सत्यमेव जयते, पीके) और रियल लाइफ (निजी जीवन, विवाह, राजनीतिक बयान) के बीच के अंतर को रेखांकित करते हुए, उन पर बहुसंख्यक समाज की धार्मिक भावनाओं की अनदेखी करने और सामाजिक मुद्दों पर चयनात्मक (Selective) रुख अपनाने का आरोप लगाया गया है।

777

फिल्मों और विज्ञापनों में 'चयनात्मक' रुख का आरोप

आलेख के अनुसार, आमिर खान अपने सामाजिक संदेशों और कलात्मक स्वतंत्रता में केवल एकतरफा दृष्टिकोण अपनाते हैं  टीवी शो 'सत्यमेव जयते' में सामाजिक बुराइयों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की वकालत करने वाले आमिर ने फिल्म 'पीके' (2014) में हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक कर्मकांडों का मजाक उड़ाया। फिल्म में पत्थरों पर सिंदूर लगाने, भगवान शिव के वेश में अभिनेता के भागने और संतों को धोखेबाज दिखाने जैसे दृश्यों पर गंभीर आपत्ति जताई गई है।

लेखक का आरोप है कि आमिर ने हिंदू मान्यताओं की तो खुलकर आलोचना की, लेकिन अपने स्वयं के मजहब (इस्लाम) की रूढ़ियों या कुरीतियों पर कभी कोई टिप्पणी या दृश्य नहीं फिल्माया। साल 2022 में एक निजी बैंक के विज्ञापन में पारंपरिक हिंदू विवाह रीति-रिवाजों (दूल्हे का दुल्हन के घर जाना) के उलट चित्रण करने पर भी उन्हें तीखी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ी थी।

 व्यक्तिगत जीवन और वैवाहिक घटनाक्रम

लेखक ने आमिर खान के निजी जीवन, शादियों और पारिवारिक निर्णयों को उनके कथित सामाजिक ज्ञान के विपरीत बताया है nआमिर ने पहली शादी रीना दत्ता (1986) और दूसरी शादी किरण राव (2005) से की। इन शादियों से हुए बच्चों (जुनैद, आइरा और आजाद) को मुस्लिम पहचान दी गई। दोनों पत्नियों से बाद में उनका तलाक हो गया।

61 वर्ष की आयु में आमिर अपनी 14 साल छोटी मित्र गौरी स्प्रैट (47 वर्ष) से एक सादे समारोह में तीसरी शादी करने जा रहे हैं। गौरी स्प्रैट बेंगलुरु की एक फैशन लाइफस्टाइल प्रोफेशनल हैं, जो एक बहु-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि (मां तमिलियन और पिता ब्रिटिश-आयरिश मूल के) से आती हैं। उनके दादा फिलिप स्प्रैट भारत के स्वतंत्रता सेनानी थे।

 भू-राजनीतिक एवं सामाजिक विवाद

आलेख में आमिर खान के उन बयानों और मुलाकातों का जिक्र है, जिन्हें राष्ट्र-विरोधी या असंवेदनशील माना गया

  • असहिष्णुता पर बयान (2015): आमिर ने बयान दिया था कि देश में बढ़ती असहिष्णुता के कारण उनकी तत्कालीन पत्नी किरण राव को बच्चों की सुरक्षा का डर लगता है और उन्होंने देश छोड़ने का विचार किया था। इस बयान के बाद उन्हें 'अतुल्य भारत' (Incredible India) के ब्रांड एंबेसडर पद से हटा दिया गया था।

  • तुर्किए (तुर्की) विवाद (2020): कश्मीर मुद्दे पर भारत-विरोधी और पाकिस्तान समर्थक रुख रखने वाले देश तुर्किए के राष्ट्रपति की पत्नी (प्रथम महिला) से आमिर की मुलाकात को भारतीय नेटिजन्स ने असंवेदनशील माना, जिसके कारण उनकी फिल्मों के बहिष्कार की मांग उठी।

  • नर्मदा बचाओ आंदोलन (2006): मेधा पाटकर के आंदोलन का समर्थन करने के कारण गुजरात में उनकी फिल्म 'फना' का भारी विरोध हुआ था।

 रील और रियल लाइफ का अंतर

लेखक ने गंभीर सामाजिक मुद्दों (जैसे पहचान छिपाकर हिंदू युवतियों को धोखा देना या अंतर-धार्मिक संबंधों में हिंसा) पर आमिर खान की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।"हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी, जिसको भी देखना है कई बार देखिए।" आलेख के अंत में प्रसिद्ध शायर निदा फ़ाज़ली के इस शेर के माध्यम से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि पर्दे पर आदर्शवाद की बातें करने वाले सुपरस्टार का वास्तविक आचरण और उनके विचार उनके स्क्रीन अवतार से पूरी तरह भिन्न और विरोधाभासी हैं।

Tags