प्रयागराज के युवा मरीज की 8 सेंटीमीटर रेयर एओर्टिक डिसेक्शन का मैक्स अस्पताल, लखनऊ में ‘फ्रोज़न एलीफेंट ट्रंक’ सर्जरी से सफल इलाज
A young patient from Prayagraj with a rare 8 cm aortic dissection was successfully treated with 'Frozen Elephant Trunk' surgery at Max Hospital, Lucknow.
Wed, 26 Nov 2025
प्रयागराज/लखनऊ डेस्क (प्रत्यूष पाण्डेय)।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, लखनऊ के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जन विशेषज्ञों ने प्रयागराज के 27 वर्षीय युवक पर बेहद जटिल और दुर्लभ “फ्रोज़न एलीफेंट ट्रंक” प्रोसिजर के माध्यम से सफल सर्जरी कर नई उम्मीद जगाई है। मरीज की एओर्टा में लगभग 8 सेंटीमीटर लंबी डिसेक्शन पाई गई थी, जो एओर्टिक रूट से लेकर एब्डॉमिनल एओर्टा तक फैली हुई थी। यह स्थिति किसी भी समय धमनी फटने और तत्काल मृत्यु का खतरा पैदा कर सकती थी।
7 घंटे चली मैराथन सर्जरी
यह चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन डॉ. विजयंत देवेनराज, डायरेक्टर एवं हेड, कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS), के नेतृत्व में पूरी टीम ने लगभग 7 घंटे तक किया।
प्रक्रिया के दौरान—
मरीज के शरीर को डीप हाइपोथर्मिक टोटल सर्क्युलेटरी अरेस्ट (DHCA) के जरिए 18°C तक ठंडा किया गया।
पूरे शरीर – दिल, दिमाग, किडनी, लिवर सहित सभी अंगों का रक्त संचार कुछ समय के लिए रोका गया।
एसेन्डिंग एओर्टा और एओर्टिक आर्च का रिप्लेसमेंट,
ब्रेन आर्टरीज़ की डिब्रांचिंग,
और डिसेन्डिंग थोरेसिक एओर्टा में हाइब्रिड स्टेंटेड ग्राफ्ट लगाया गया।
ये सभी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ एक ही ऑपरेशन में सफलतापूर्वक की गईं।
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मरीज की हालत और निदान
मरीज आलोक पिछले पाँच महीनों से तेज सीने के दर्द और सांस फूलने की समस्या से जूझ रहे थे। शुरुआत में उन्होंने इसे आम गैस या सीने की जकड़न मानकर अनदेखा कर दिया।
स्थिति गंभीर होने पर परिवार उन्हें मैक्स अस्पताल लेकर पहुंचा, जहाँ जांच के दौरान जीवन-घातक एओर्टिक डिसेक्शन सामने आई।
डॉक्टरों ने यह भी संभावना जताई कि मरीज को मार्फन सिंड्रोम — एक जन्मजात कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर — हो सकता है, जिसकी वजह से ऐसी खतरनाक वैस्कुलर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
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डॉ. विजयंत देवेनराज ने बताया मामला कितना जटिल था
उन्होंने कहा आलोक की एओर्टा में 8 सेमी की डिसेक्शन थी जो एओर्टिक रूट से शुरू होकर एब्डॉमिनल एओर्टा तक पहुंच चुकी थी। यह दिमाग, सीने और पेट के मुख्य अंगों को खून पहुंचाने वाली धमनियों को भी प्रभावित कर रही थी। कम उम्र में यह स्थिति बेहद असामान्य और जोखिमपूर्ण थी। इसलिए हमने ‘फ्रोज़न एलीफेंट ट्रंक’ जैसी उन्नत और हाइब्रिड सर्जरी करने का निर्णय लिया।”
उन्होंने आगे बताया कि यह प्रोसिजर आकार में हाथी की सूंड जैसा दिखने वाले स्टेंट-ग्राफ्ट के कारण “फ्रोज़न एलीफेंट ट्रंक” कहलाता है।
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पोस्ट-ऑपरेशन रिकवरी
सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू में दो दिन वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।
इतने बड़े ऑपरेशन के बावजूद—
रक्तस्राव बेहद कम हुआ,
अंगों की कार्यक्षमता सामान्य रही,
और मरीज तेजी से स्वस्थ होते गए।
सर्जरी के 10 दिन बाद उन्हें स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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मैक्स अस्पताल – जटिल हृदय व वैस्कुलर मामलों का भरोसेमंद केंद्र
इस सफल केस ने एक बार फिर साबित किया है कि मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, लखनऊ, हृदय और वैस्कुलर रोगों के अत्यंत जटिल मामलों के उपचार में आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञता और उच्च-स्तरीय सर्जिकल दक्षता का उत्कृष्ट संयोजन प्रदान करता है।
