25 अगस्त को रामहरि जयंती में जुटेंगे देशभर के गांधीवादी चिंतक, सवा करोड़ मंत्र जाप का लिया जाएगा संकल्प
(अम्बरीष कुमार सक्सेना)
शाहजहांपुर। विनोबा सेवा आश्रम परिसर स्थित रामहरि मंडपम में 25 अगस्त को 52वीं रामहरि जयंती समारोह का आयोजन किया जाएगा। समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से गांधीवादी चिंतक, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और अन्य प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी। कार्यक्रम को लेकर आश्रम परिसर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
विनोबा से ‘रामहरि’ तक की यात्रा
बाबा विनोबा भावे ने अपने जीवन में विनायक नाम, ब्राह्मण जाति और भावे उपनाम तक का त्याग कर दिया था। बाद में उन्हें लगा कि ‘विनोबा’ नाम का अहंकार भी कहीं शेष न रह जाए। इसी भावना के तहत उन्होंने 25 अगस्त 1974 से अपने हस्ताक्षर में ‘रामहरि’ लिखना शुरू किया था।
इस ऐतिहासिक प्रसंग की स्वर्णजयंती के अवसर पर वर्ष 2024 में विनोबा सेवा आश्रम में रामहरि समागम का आयोजन किया गया था, जिसमें उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी सहभागिता की थी।
देशभर से जुटेंगे गांधीवादी चिंतक
इस वर्ष समारोह में भागलपुर, बिहार की प्रख्यात गांधीवादी चिंतक डॉ. सुजाता चौधरी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगी। दिल्ली राष्ट्रीय युवा योजना के ट्रस्टी अजय कुमार पांडे विषय प्रवेश कराएंगे। वहीं स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय, शाहजहांपुर के कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह मुख्य अतिथि होंगे।
विशिष्ट अतिथियों में दिल्ली से नेशनल एक्सप्रेस के मुख्य संपादक विपिन कुमार गुप्ता, पूर्व डीन शकुंतला विश्वविद्यालय डॉ. अवनीश चंद्र मिश्र, एचएसएस गांधी आश्रम ट्रस्ट दिल्ली की मैनेजिंग ट्रस्टी उर्मिला बहन, ऐम ट्रस्ट के निदेशक संजय राय, गांधी भवन लखनऊ के सचिव एलबी राय तथा जय जगत सेवा आश्रम जौनपुर के अमित परमार शामिल होंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विनोबा सेवा आश्रम के अध्यक्ष संजय कुमार राय करेंगे, जबकि संचालन पूर्व वैज्ञानिक एवं योगाचार्य करुणेश राय द्वारा किया जाएगा।
एक वर्ष में सवा करोड़ रामहरि मंत्र जाप का संकल्प
समारोह में विनोबा रत्न और विनोबा सेवा सम्मान भी प्रदान किए जाएंगे। इसके साथ ही विनोबा विचार प्रवाह के सूत्रधार रमेश भइया एक वर्ष में सवा करोड़ रामहरि मंत्र जाप करने का संकल्प लेंगे। इसके लिए प्रतिदिन 300 मालाओं के जाप का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। समारोह के दौरान विश्वस्तरीय रामहरि मंदिर के निर्माण का संकल्प भी दोहराया जाएगा। आयोजकों का उद्देश्य विनोबा भावे के त्याग, सेवा, अहिंसा और मानव कल्याण के विचारों को समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।
