भारतीय एकता का अद्भुत प्रतीक गणेशोत्सव
Ganeshotsav is a wonderful symbol of Indian unity
Sun, 31 Aug 2025
(चारु सक्सेना – विभूति फीचर्स)
भारत जैसे विशाल और विविधता से भरे देश में गणेशोत्सव ऐसा पर्व है जो लोगों को एक सूत्र में बांधने का कार्य करता है। उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक, पूरे देश में यह उत्सव राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक माना जाता है।
लोकमान्य तिलक का योगदान
गणेश पूजा प्राचीन काल से प्रचलित रही है, किंतु इसे सार्वजनिक और सामाजिक रूप देने का श्रेय लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को जाता है। उस समय देश अंग्रेज़ों की गुलामी झेल रहा था और उनकी “फूट डालो और राज करो” की नीति ने समाज को बुरी तरह विभाजित कर दिया था। आपसी मतभेद और संघर्ष के कारण राष्ट्रीय चेतना लगभग लुप्त हो चुकी थी। ऐसे समय में तिलक ने समाज को जागृत करने और एकजुट करने के लिए गणेशोत्सव को सार्वजनिक स्वरूप प्रदान किया।
उन्होंने गणेशजी, जो बुद्धि और विवेक के देवता माने जाते हैं, को सामाजिक एकता का केंद्र बनाया और संदेश दिया कि जब तक लोग विवेक और ज्ञान को महत्व नहीं देंगे, तब तक स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकता। इस प्रकार महाराष्ट्र से आरंभ हुआ यह उत्सव धीरे-धीरे पूरे भारत में राष्ट्रीय पर्व के रूप में स्थापित हो गया।
सांस्कृतिक और धार्मिक आयाम
आज गणेशोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। इस अवसर पर संगीत, भजन, कीर्तन, प्रवचन और नाट्य प्रस्तुतियों जैसे कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिससे समाज में सौहार्द्र और भाईचारे का वातावरण निर्मित होता है।
गणेश चतुर्थी का महत्व
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन से पूरे देश में विशेष तैयारियां होती हैं। महाराष्ट्र में “गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया” के जयकारों से गलियां गूंज उठती हैं। लोग नये परिधान पहनकर बाजारों से गणेशजी की मूर्तियां खरीदते हैं और घरों व पंडालों में उनकी स्थापना करते हैं।
परंपराएं और विविधताएं
गणेश मूर्ति की स्थापना की अवधि अलग-अलग परंपराओं के अनुसार होती है—कहीं डेढ़ दिन, कहीं पांच, सात, नौ या पूरे दस दिन तक, जो अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन के साथ संपन्न होता है। कई स्थानों पर गणेश के साथ गौरी पूजा भी प्रचलित है।
सबसे खास बात यह है कि गणेशोत्सव केवल घरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मोहल्लों और समाज स्तर पर भी सार्वजनिक गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है। कई जगहों पर इनकी ऊंचाई सौ फुट तक होती है, जो इस पर्व की भव्यता और जनसमूह की आस्था को दर्शाती है।
