जानलेवा साबित हो रहे गैस गीजर और अंगीठी
(मनोज कुमार अग्रवाल – विनायक फीचर्स) देश के कई हिस्सों में इन दिनों पड़ रही कड़ाके की ठंड के कारण तापमान शून्य से नीचे चला गया है। ठंड से बचने के लिए लोग अक्सर बंद कमरों में अंगीठी जलाकर सो जाते हैं या बिना वेंटिलेशन वाले बाथरूम में गैस गीजर का उपयोग करते हैं। यही आदतें हर साल सैकड़ों जिंदगियों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं।
बंद कमरे में लकड़ी या कोयले की अंगीठी जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है, जो हवा में ऑक्सीजन की मात्रा को तेजी से कम कर देती है। यह गैस सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सीधे मस्तिष्क और रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन को प्रभावित करती है, जिससे दम घुटना, बेहोशी और अंततः मौत तक हो सकती है। इसी तरह, बंद बाथरूम में गैस गीजर चलाने से भी ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और कुछ ही मिनटों में स्थिति जानलेवा बन सकती है।
हालिया घटनाएं चेतावनी हैं
पिछले कुछ सप्ताहों में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी अनेक हृदयविदारक घटनाएं सामने आई हैं—
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22 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में गैस गीजर से नहाते समय ऑक्सीजन की कमी के कारण एक दंपति की मौत हो गई।
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2 जनवरी को पंजाब में एक राजनीतिक नेता की 22 वर्षीय पुत्री की बाथरूम में दम घुटने से मृत्यु हो गई।
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27 दिसंबर 2025 को बिहार के छपरा में अंगीठी जलाकर सो रहे तीन बच्चों और उनकी नानी की मौत हो गई।
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31 दिसंबर 2025 को गया (बिहार) में भाई-बहन और उनकी नानी की इसी कारण जान चली गई।
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8–11 जनवरी 2026 के बीच पंजाब, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड और बिहार में ऐसी ही घटनाओं में कई मासूम बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जान चली गई।
इन घटनाओं में एक समान कारण सामने आया—बंद स्थानों में अंगीठी या गैस गीजर का उपयोग।
गैस गीजर: एक खामोश खतरा
एलपीजी से चलने वाला गैस गीजर पानी गर्म करने के दौरान आंशिक दहन करता है, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड निकलती है। यह गैस न दिखाई देती है और न ही सूंघी जा सकती है। इसलिए पीड़ित को खतरे का आभास तक नहीं होता। पहले चक्कर आते हैं, फिर घबराहट, बेहोशी और कई मामलों में मौत हो जाती है।
जरूरी सावधानियां
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बंद कमरे में कभी भी अंगीठी जलाकर न सोएं।
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यदि अंगीठी जलानी पड़े, तो सोने से पहले उसे पूरी तरह बुझा दें।
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कमरे और बाथरूम में खिड़की व रोशनदान खुले रखें।
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गैस गीजर का उपयोग केवल अच्छे वेंटिलेशन वाले बाथरूम में करें।
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संभव हो तो इलेक्ट्रिक गीजर का इस्तेमाल करें।
जागरूकता की जरूरत
हर साल देश में ऐसी लापरवाहियों के कारण हजार से अधिक लोग असमय जान गंवा देते हैं। यह बेहद चिंताजनक है। स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और मीडिया को चाहिए कि लोगों को लगातार जागरूक करें, ताकि ठंड से बचने के उपाय जीवन के लिए खतरा न बनें और परिवार उजड़ने से बच सकें।

