विज्ञान प्रदर्शनी में छात्राओं ने दिखाई प्रतिभा और नवाचार की झलक
लखनऊ, 16 सितंबर 2026। महिला विद्यालय इंटर कॉलेज, अमीनाबाद में बुधवार को विज्ञान प्रदर्शनी 2026-27 का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्देश्य छात्राओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार, रचनात्मकता और समस्या-समाधान की क्षमता को बढ़ावा देना रहा। कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए विभिन्न वैज्ञानिक विषयों पर मॉडल प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार रहे। विद्यालय के प्रबंधक शशि श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ एवं पौधा भेंट कर स्वागत किया। प्रधानाचार्या अंजली सिंह ने प्रबंधक शशि श्रीवास्तव तथा कोषाध्यक्ष एस.डी. सावंत का स्वागत किया।
प्रदर्शनी का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. दिनेश कुमार, प्रबंधक एवं प्रधानाचार्या ने दीप प्रज्वलित कर तथा डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम एवं डॉ. सी.वी. रमन के चित्रों पर माल्यार्पण कर किया। इसके बाद अतिथियों ने छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मॉडलों का अवलोकन किया और उनकी कार्यप्रणाली, वैज्ञानिक आधार एवं उपयोगिता के बारे में जानकारी ली। छात्राओं ने आत्मविश्वास के साथ अपने-अपने मॉडल की कार्यप्रणाली और उपयोगिता समझाई।
बायोप्लास्टिक और एआई रोबोट समेत कई मॉडल आकर्षण का केंद्र
प्रदर्शनी में करीब 200 छात्राओं ने 80 मॉडल प्रस्तुत किए। रसायन विज्ञान के अंतर्गत बायोप्लास्टिक, एडवांस्ड वेस्ट वाटर मैनेजमेंट, माइक्रोप्लास्टिक, इथेनॉल इन किचन तथा E10 और E20 जैसे विषयों पर मॉडल तैयार किए गए।भौतिक विज्ञान में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ट्रेन, एआई रोबोट, कचरे से ऊर्जा उत्पादन और ऊर्जा रूपांतरण जैसे वर्किंग मॉडल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। जीव विज्ञान के अंतर्गत छात्राओं ने मानव शरीर के विभिन्न तंत्रों, पौधों में जनन, पर्यावरणीय संरचना तथा अजैविक कारकों के चक्रण को मॉडल के माध्यम से प्रदर्शित किया।

मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने प्रदर्शनी का निरीक्षण करते हुए छात्राओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से बायोप्लास्टिक, इथेनॉल इन किचन, डबल फर्टिलाइजेशन एवं ट्रिपल फ्यूजन जैसे नवाचारी मॉडलों को उल्लेखनीय बताया।
स्थिर मॉडलों में प्लास्टिक से बचने की अपील
डॉ. दिनेश कुमार ने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि प्रदर्शनी में प्रस्तुत मॉडल नवीन विचारों और वैज्ञानिक सोच को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मॉडल आगामी विज्ञान प्रतियोगिताओं में विद्यालय को नई पहचान दिला सकते हैं।

उन्होंने स्थिर वैज्ञानिक मॉडल तैयार करते समय प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्लास्टिक प्रदूषण समाज के सामने बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक है। उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए स्थिर मॉडलों में प्लास्टिक से बचने की सलाह देते हुए उन्होंने इसके स्थान पर डिग्रेडेबल गत्ते और रंगीन कागज जैसी सामग्री के उपयोग पर जोर दिया।
वैज्ञानिकता और नवाचार के आधार पर हुआ मूल्यांकन
प्रदर्शनी में प्रस्तुत मॉडलों का मूल्यांकन डिग्री विभाग के प्राचार्य एवं दो विज्ञान शिक्षकों के निर्णायक मंडल द्वारा किया गया। मॉडलों को वैज्ञानिकता, नवाचार, उपयोगिता एवं प्रस्तुतीकरण के आधार पर परखा गया।विद्यालय की प्रधानाचार्या अंजली सिंह ने कहा, “विज्ञान की तार्किक दृष्टि और शिक्षा के मानवीय मूल्यों के समन्वय से विद्यालय को उत्कृष्टता की नई ऊंचाइयों तक ले जाना मेरा संकल्प है।”

प्रदर्शनी के सफल आयोजन में विज्ञान शिक्षिकाओं रीना अवस्थी, मनोरमा इंदु, विद्या धारिया, कृति किरण, मधु साहू, आशा लता, अर्चना श्रीवास्तव एवं अंजली अवस्थी का मार्गदर्शन और सहयोग रहा।विद्यालय के प्रबंधक एवं कोषाध्यक्ष ने छात्राओं के प्रयासों और उनके द्वारा तैयार किए गए मॉडलों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रदर्शनी ने छात्राओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सृजनात्मकता, नवाचार और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने के साथ उन्हें विज्ञान को व्यवहारिक रूप में समझने का अवसर प्रदान किया।


