न्यूयॉर्क में बांग्लादेशी प्रवासियों का प्रदर्शन: मोहम्मद यूनुस के खिलाफ उठी आवाज, लगे 'पाकिस्तान वापस जाओ' के नारे

 
 Go Back to Pakistan!" Muhammad Yunus Faces Protests in New York Over Hindu Atrocities in Bangladesh

 हम बात करेंगे बांग्लादेश के अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस पर न्यूयॉर्क में हुए बड़े प्रदर्शन की। संयुक्त राष्ट्र (UN) के बाहर बांग्लादेशी प्रवासियों ने 'पाकिस्तान वापस जाओ' के नारे लगाते हुए हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई। क्या है ये विवाद? क्यों यूनुस पर लग रहे हैं गंभीर आरोप?

आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसी घटना की, जो बांग्लादेश की राजनीति को हिला रही है। कल, 26 सितंबर 2025 को, न्यूयॉर्क के संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर सैकड़ों बांग्लादेशी प्रवासी सड़कों पर उतर आए। उनके हाथों में बैनर थे - 'स्टॉप किलिंग हिंदूज', 'फ्री चिनमॉय कृष्ण दास', और सबसे जोरदार नारा था - 'यूनुस इज पाकिस्तानी, गो बैक टू पाकिस्तान!'  क्यों? क्योंकि ये लोग बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर, नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। आरोप ये कि यूनुस की सरकार के आने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ गए हैं। मंदिर जलाए जा रहे हैं, घर लूटे जा रहे हैं, और लाखों लोग देश छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।  

 सबसे पहले समझते हैं बैकग्राउंड। बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर आया था अगस्त 2024 में। स्टूडेंट प्रोटेस्ट्स के बाद तत्कालीन प्राइम मिनिस्टर शेख हसीना को देश छोड़कर भारत आना पड़ा। हसीना की 15 साल की सरकार गिर गई, और सेना ने नोबेल पीस प्राइज विजेता मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का चीफ एडवाइजर बना दिया। यूनुस को गरीबी उन्मूलन के लिए जाना जाता है, लेकिन अब उन पर सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप है।  हसीना के जाने के बाद बांग्लादेश में अराजकता फैल गई। खासकर अल्पसंख्यक समुदायों - हिंदू, बौद्ध, ईसाई - पर हमले शुरू हो गए। आंकड़े चौंकाने वाले हैं। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल के मुताबिक, अगस्त 2024 से सितंबर 2025 तक 2,000 से ज्यादा हमले हुए। मंदिर तोड़े गए, घर जलाए गए, और महिलाओं पर अत्याचार की खबरें आईं। 

हिंदू आबादी, जो 1951 में 22% थी, अब घटकर 8% रह गई है। experts  कहते हैं कि ये हमले राजनीतिक हैं - हसीना समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि ज्यादातर हिंदू उनकी पार्टी से जुड़े थे। लेकिन यूनुस सरकार पर आरोप है कि वो चुप्पी साधे हुए है, और जिहादी ग्रुप्स जैसे जमात-ए-इस्लामी को बढ़ावा दे रही है। 

अब आते हैं मुख्य घटना पर। 26 सितंबर 2025 को, यूनुस UNGA 80th सेशन में स्पीच देने न्यूयॉर्क पहुंचे। लेकिन UN हेडक्वार्टर के बाहर सैकड़ों बांग्लादेशी डायस्पोरा ने घेर लिया। ये लोग ज्यादातर शेख हसीना के समर्थक थे, जो अमेरिका में बसे हैं। प्रोटेस्टर्स ने बैनर्स लहराए - 'स्टॉप किलिंग माइनॉरिटीज', 'हिंदू किलर यूनुस, स्टेप डाउन!' एक प्रोटेस्टर ने ANI से कहा, 'यूनुस ने बांग्लादेश को तालिबान जैसा बना दिया है। हिंदुओं, बौद्धों, ईसाइयों पर अत्याचार हो रहे हैं। लाखों हिंदू देश छोड़ चुके हैं।' 

  दूसरे ने कहा, '5 अगस्त 2024 से अब तक, यूनुस के आने के बाद हिंसा बढ़ी। हम चुनाव चाहते हैं, यूनुस को सत्ता से हटाओ!' 

 प्रोटेस्टर्स ने यूनुस को 'पाकिस्तानी' कहकर निशाना बनाया, क्योंकि उनका आरोप है कि यूनुस भारत-विरोधी ताकतों को बढ़ावा दे रहे हैं। ये प्रदर्शन हसीना समर्थकों का था, जो यूनुस को 'अवैध सत्ता' मानते हैं। इससे पहले भी, सितंबर 2024 में यूनुस के न्यूयॉर्क आने पर होटल के बाहर अंडे फेंके गए थे। 

 लेकिन इस बार UN के बाहर का धरना सबसे बड़ा था। प्रोटेस्टर्स ने UN से अपील की कि यूनुस को बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व करने न दें। अब सुनते हैं दूसरे पक्ष को। यूनुस ने UNGA में स्पीच दी, जहां उन्होंने बांग्लादेश की 'ट्रांसफॉर्मेशन' की बात की। उन्होंने कहा, 'हमारी जनता ने विद्रोह से नई शुरुआत की है। हम जीरो पॉवर्टी, जीरो अनएम्प्लॉयमेंट का सपना देख रहे हैं।' 

  लेकिन अल्पसंख्यक हिंसा पर? यूनुस ने हमेशा इसे 'ओवरहाइप्ड' बताया। सितंबर 2024 में उन्होंने कहा, 'ये हमले सांप्रदायिक नहीं, राजनीतिक हैं। हिंदू हसीना समर्थक माने जाते हैं, इसलिए निशाना।' UN रिपोर्ट को भी उन्होंने खारिज किया। उनके ऑफिस ने कहा कि पुलिस जांच में 98% मामले राजनीतिक निकले। 

  यूनुस के समर्थक कहते हैं कि हसीना के समय भी दमन था, और अब सुधार हो रहा है। लेकिन प्रोटेस्टर्स का कहना है कि यूनुस की चुप्पी हिंसा को बढ़ावा दे रही है। ये मुद्दा भारत के लिए भी बड़ा है। भारत ने हमेशा बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा की बात की। PM मोदी ने कहा, 'हिंदू भाइयों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं।' 

 हसीना भारत में शरणार्थी हैं, और यूनुस ने भारत को दोषी ठहराया कि वो हसीना को शरण दे रहे हैं।  UN ने भी चिंता जताई है। 

 ये प्रदर्शन बांग्लादेशी हिंदुओं की पीड़ा का प्रतीक है। यूनुस को जवाब देना होगा - क्या वो अल्पसंख्यकों की रक्षा करेंगे, या सत्ता की भूख में चुप रहेंगे ? भारत को आवाज उठानी होगी।  आपकी क्या राय है? कमेंट्स में बताएं। 

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