सोने की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार में $4000 के नीचे आया गोल्ड, 2008 के बाद की सबसे बड़ी मासिक मंदी
वैश्विक सर्राफा बाजार से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। यदि आप सोने में निवेश करने की योजना बना रहे हैं या पहले से निवेश कर चुके हैं, तो जून 2026 के आंकड़े आपको चौंका सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में जबरदस्त ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। केवल जून महीने के भीतर ही गोल्ड की कीमतें 12% तक टूट गईं और यह $4,000 प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गईं।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर यह अक्टूबर 2008 (वैश्विक मंदी का दौर) के बाद से सोने की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। लगातार कई कारोबारी सत्रों से सोने की कीमतों पर चौतरफा दबाव साफ देखा जा रहा है।
रिकॉर्ड स्तर से लुढ़का सोना, 7 महीने के निचले स्तर पर पहुंची कीमतें
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) की कीमत गिरकर $3,975 प्रति औंस के करीब आ गई है, जबकि जून के आखिरी दिनों में यह एक समय $3,943 के स्तर तक जा पहुंची थी। यह गिरावट इसलिए भी बड़ी है क्योंकि इस साल जनवरी 2026 में सोने ने करीब $5,595 प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई (All-Time High) रिकॉर्ड बनाया था।
उस रिकॉर्ड स्तर से सोना करीब 30% तक क्रैश हो चुका है। जून में आई 12% की इस मंदी ने सोने को लगातार चौथे महीने नुकसान की राह पर धकेल दिया है, जिससे साल 2024 के बाद पहली बार गोल्ड में त्रैमासिक (Quarterly) गिरावट भी दर्ज की गई है।
आखिर क्यों ताश के पत्तों की तरह टूट रही हैं सोने की कीमतें?
बाजार के जानकारों ने सोने की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से 3 बड़े कारण बताए हैं:
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मजबूत अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड: अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड (Treasury Yield) लगातार बढ़ रही है और अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अपने बहु-वर्षीय उच्च स्तर (Multi-year High) पर पहुंच गया है। डॉलर मजबूत होने से विदेशी निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा और कम आकर्षक हो जाता है।
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फेडरल रिजर्व का आक्रामक रुख: अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों में कटौती के बजाय आगे और बढ़ोतरी (Rate Hike) करने की संभावना जताई जा रही है। चूंकि सोना एक गैर-ब्याज वाला (Non-yielding) एसेट है, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के माहौल में निवेशक सोने से पैसा निकालकर बॉन्ड्स और फिक्स्ड इनकम ऑप्शंस में लगाने लगते हैं।
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सुरक्षित निवेश (Safe-Haven) के रूप में विफलता: आमतौर पर पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और महंगाई के समय सोने की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण पैदा हुई मुद्रास्फीति ने केंद्रीय बैंकों को अपनी नीतियां और सख्त करने पर मजबूर कर दिया, जिससे सोने को सेफ-हेवन रैली का फायदा नहीं मिल सका।
आगे कैसा रहेगा गोल्ड का रुख और क्या है एक्सपर्ट्स की सलाह?
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मार्केट का आउटलुक: कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि शॉर्ट-टर्म (कम अवधि) में सोने की कीमतों पर यह दबाव और उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। आगामी दिनों में अमेरिका के रोजगार के आंकड़े, मुद्रास्फीति के डेटा और डॉलर की चाल ही सोने की अगली दिशा तय करेंगे। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, यदि सोना $4,000 के ऊपर खुद को दोबारा स्थापित नहीं कर पाता, तो इसमें और करेक्शन देखा जा सकता है।
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निवेशकों के लिए रणनीति: शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए बाजार अभी जोखिम भरा है, लेकिन लॉन्ग-टर्म (लंबी अवधि) के निवेशकों के लिए यह गिरावट एक बेहतरीन अवसर हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से (SIP मोड में) खरीदारी करने पर विचार करें।
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भारतीय बाजार पर असर: भारतीय निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले घरेलू बाजार (MCX) पर गिरावट थोड़ी कम रही है। इसके पीछे मुख्य कारण रुपये की कमजोरी और हाल ही में आयात शुल्क (Import Duty) में किए गए बदलाव हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मंदी के असर को घरेलू बाजार में कुछ हद तक संभाल रहे हैं।
