लखनऊ में शुद्ध पेयजल के लिए गोमतीनगर जनकल्याण महासमिति की बड़ी पहल; रक्षा मंत्री कार्यालय ने लिया संज्ञान
इंदौर की घटना के बाद बढ़ी सतर्कता
महासमिति ने अपने पत्र में मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित जल आपूर्ति के कारण हुई जनहानि का हवाला देते हुए लखनऊ में भी ऐसी किसी स्थिति से बचने के लिए पूर्व-नियोजित कदम उठाने का आग्रह किया है। समिति का मानना है कि पेयजल और सीवर लाइनों का पुराना होना और उनके आपस में मिलने (Cross-contamination) की संभावना नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।
📋 महासमिति की प्रमुख मांगें
महासमिति ने रक्षा मंत्री से निम्नलिखित बिंदुओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है:
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क्लोरीन का मानक मिश्रण: आपूर्ति किए जाने वाले पानी में क्लोरीन की मात्रा मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाए।
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लीकेज की मरम्मत: वाटर और सीवर लाइनों के लीकेज को तत्काल युद्धस्तर पर ठीक किया जाए।
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टैंकों की सफाई: जलापूर्ति वाले सभी ओवरहेड टैंकों की नियमित और वैज्ञानिक पद्धति से सफाई हो।
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पुरानी लाइनों को बदलना: दशकों पुरानी हो चुकी वाटर और सीवर लाइनों को बदलकर नई पाइपलाइन डाली जाए।
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मिक्सिंग रोकना: सीवर और पेयजल लाइनों के मिश्रण को रोकने के लिए तकनीकी ऑडिट कराया जाए।
🏛️ रक्षा मंत्री कार्यालय की त्वरित कार्रवाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी और जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राघवेंद्र शुक्ला ने इस विषय की गंभीरता को देखते हुए तत्काल सक्रियता दिखाई है। उन्होंने महासमिति के सुझावों और मांगों को संज्ञान में लेते हुए:
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मुख्य सचिव (उत्तर प्रदेश शासन) और मंडलायुक्त (लखनऊ) को पत्र प्रेषित किया है।
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संबंधित कार्यदायी संस्थाओं (जल निगम/नगर निगम) को कड़े निर्देश देने का अनुरोध किया है।
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जलापूर्ति व्यवस्था की सतत निगरानी और जवाबदेही तय करने की बात कही है।
🤝 सामाजिक सरोकार की मिसाल
गोमतीनगर जनकल्याण महासमिति के इस प्रयास की सराहना करते हुए स्थानीय नागरिकों ने कहा कि पेयजल जैसे बुनियादी मुद्दे पर शासन-प्रशासन की निरंतर निगरानी आवश्यक है। रक्षा मंत्री कार्यालय के इस त्वरित हस्तक्षेप से उम्मीद जगी है कि लखनऊ के संवेदनशील इलाकों में पुरानी पाइपलाइनों को बदलने और जल शोधन की प्रक्रिया में सुधार होगा।
