Gonda News: श्री हंस ज्ञान आश्रम में तीन दिवसीय 'बाल संस्कार शिविर' संपन्न; 120 बच्चों ने लिया नैतिक और आध्यात्मिक उत्थान का संकल्प
नई पीढ़ी में उच्च नैतिक मूल्यों, सुदृढ़ चरित्र और आध्यात्मिक चेतना का संचार करने के उद्देश्य से स्थानीय उतरौला रोड स्थित श्री हंस ज्ञान आश्रम, गोंडा में आयोजित तीन दिवसीय 'बाल संस्कार शिविर' (बालसभा कार्यक्रम) का सफल समापन हो गया। मानव उत्थान सेवा समिति एवं मानव धर्म के प्रणेता सतगुरु देव श्री सतपाल जी महाराज की पावन प्रेरणा से आयोजित यह शिविर बच्चों के सर्वांगीण विकास में एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ। 12 जून को शुरू हुए इस तीन दिवसीय विशेष आयोजन में देवीपाटन मण्डल के सुदूर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से आए लगभग 120 बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया।
स्वच्छता से लेकर योग और खेलकूद तक की गतिविधियां
शिविर के दौरान बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं:
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स्वास्थ्य और चेतना: बच्चों को दैनिक जीवन में स्वस्थ रहने के गुर सिखाने के लिए विशेष योगासन और खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
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संस्कार और संस्कृति: भारतीय संस्कृति के मूल्यों से जोड़ने के लिए शिविर में सरस्वती पूजन, यज्ञ-हवन और पवित्र कन्या पूजन का अनुष्ठान किया गया।
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समाजिक दायित्व: बच्चों को जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाने के लिए आश्रम परिसर और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान चलाया गया।
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प्रतिभा सम्मान: विभिन्न सांस्कृतिक और बौद्धिक प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी बच्चों को मंच पर स्मृति चिह्न देकर सम्मानित और प्रोत्साहित किया गया।
बड़ों का सम्मान और सही राह चुनना ही शिविर का लक्ष्य
कार्यक्रम के उद्देश्यों और गतिविधियों के विषय में विस्तृत जानकारी देते हुए समिति के सदस्य श्री शिवराम प्रजापति ने बताया, "इस बाल संस्कार शिविर का मुख्य ध्येय बच्चों में नैतिक, चारित्रिक और आध्यात्मिक उत्थान लाना है। वर्तमान समय में बच्चों को अच्छे संस्कार देना बेहद जरूरी है ताकि वे अपने माता-पिता की सेवा करें, समाज में बड़ों का आदर व सम्मान करें और किसी भी प्रकार के गलत रास्ते पर जाने से बचें।"
उन्होंने आगे बताया कि इस शिविर में देवीपाटन मण्डल के अंतर्गत आने वाले जनपद गोंडा, बहराइच और बलरामपुर के विभिन्न क्षेत्रों से 120 बच्चों ने हिस्सा लिया। शिविर की रूपरेखा इस तरह तैयार की गई थी कि खेल-खेल और मनोरंजन के माध्यम से बच्चे जीवन के गूढ़ और उपयोगी सिद्धांतों को आसानी से सीख सकें।
समाज निर्माण में बच्चों की भूमिका
शिविर के समापन के अवसर पर आश्रम के प्रबुद्ध वक्ताओं ने कहा कि बच्चे ही देश और समाज का भविष्य हैं। यदि बचपन से ही उन्हें सही दिशा, संस्कार और आध्यात्मिक मार्गदर्शन मिले, तो वे आगे चलकर एक आदर्श नागरिक बनते हैं। मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा आयोजित इस प्रकार के शिविर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और युवा पीढ़ी को भटकाव से बचाने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।



