सरकारी शिकायत Closed हो गई, लेकिन समाधान नहीं मिला? RTI और अपील से ऐसे मांगें पूरा रिकॉर्ड
क्या कभी आपने सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाए हों, शिकायत दर्ज कराई हो, जरूरी दस्तावेज और सबूत दिए हों और कुछ दिनों बाद मोबाइल पर मैसेज आया हो—“आपकी शिकायत का निस्तारण कर दिया गया है।”लेकिन जब आपने निस्तारण रिपोर्ट देखी, तो न मौके की सही जांच का उल्लेख मिला, न आपके दिए गए सबूतों का जिक्र था और न ही आपको लगा कि अधिकारी ने आपकी पूरी बात सुनी है।
ऐसे में सवाल उठता है—क्या सिर्फ ‘Closed’ या ‘Resolved’ लिख देने से शिकायत का मामला खत्म हो जाता है?जरूरी नहीं।
अगर आपको लगता है कि पुलिस, लेखपाल, राजस्व अधिकारी या किसी अन्य सरकारी अधिकारी ने आपकी शिकायत पर गलत, अधूरी या असंतोषजनक रिपोर्ट लगाकर मामला बंद किया है, तो उपलब्ध रिकॉर्ड हासिल करने और लागू अपील व्यवस्था के जरिए निस्तारण को चुनौती देने के रास्ते मौजूद हो सकते हैं।
सबसे पहले सुरक्षित करें शिकायत का पूरा रिकॉर्ड
मान लीजिए आपने जमीन, पुलिस कार्रवाई, राजस्व विवाद या किसी सरकारी लापरवाही को लेकर किसी grievance portal पर शिकायत की। जांच के बाद पोर्टल पर जवाब आया—“मामला निस्तारित कर दिया गया।”
लेकिन आपको लगता है कि रिपोर्ट वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती।
ऐसे में सबसे पहले शिकायत से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित कर लें।
इसमें शामिल हैं—
- शिकायत का registration number
- शिकायत दर्ज करने की तारीख
- संबंधित विभाग और अधिकारी का नाम
- निस्तारण/closure report
- पोर्टल पर दर्ज टिप्पणियां
- अपलोड किए गए दस्तावेज और फोटो
- शिकायत की स्थिति दिखाने वाले screenshots
- आपके द्वारा जमा किए गए आवेदन और सबूत
आगे की प्रक्रिया में यही दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
RTI से क्या मांगें?
अब आता है एक महत्वपूर्ण रास्ता—सूचना का अधिकार यानी RTI।
लेकिन RTI आवेदन तैयार करते समय एक बात का ध्यान रखना जरूरी है। अधिकारी से यह पूछने के बजाय कि “आपने गलत रिपोर्ट क्यों लगाई?”, उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगना ज्यादा उपयोगी होता है।
उदाहरण के तौर पर RTI में पूछा जा सकता है—
- मेरी शिकायत की जांच किस अधिकारी को सौंपी गई?
- शिकायत किस तारीख को और किस अधिकारी को भेजी गई?
- जांच से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाए।
- यदि मौके का निरीक्षण किया गया था, तो उससे संबंधित रिपोर्ट की प्रति दी जाए।
- जांच के दौरान दर्ज किए गए उपलब्ध बयान/रिकॉर्ड की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं।
- जांच के दौरान तैयार की गई नोटशीट, पत्राचार, फोटो या अन्य संबंधित रिकॉर्ड की प्रतियां दी जाएं।
- शिकायत बंद करने के लिए जिस रिपोर्ट, आदेश या दस्तावेज को आधार बनाया गया, उसकी प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाए।
यानी RTI में मुख्य लक्ष्य होना चाहिए—रिकॉर्ड हासिल करना, न कि अधिकारी से स्पष्टीकरण या राय मांगना।
Central और State RTI में अंतर समझें
एक महत्वपूर्ण बात यहां समझना जरूरी है।
केंद्र सरकार के संबंधित विभागों के लिए RTI Online के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। वहीं राज्य सरकार के विभागों के मामलों में संबंधित राज्य की RTI व्यवस्था या विभाग के Public Information Officer यानी PIO के माध्यम से आवेदन करना पड़ सकता है।
इसलिए आवेदन करने से पहले यह देखना जरूरी है कि संबंधित विभाग केंद्र सरकार के अधीन है या राज्य सरकार के।
RTI का जवाब संतोषजनक न हो तो?
अगर RTI आवेदन का जवाब नहीं मिलता या उपलब्ध सूचना से आप संतुष्ट नहीं हैं, तो परिस्थितियों के अनुसार First Appeal का रास्ता अपनाया जा सकता है।
RTI Online व्यवस्था में ऑनलाइन दाखिल RTI के लिए first appeal की प्रक्रिया उपलब्ध है और इसके लिए मूल RTI registration number का इस्तेमाल किया जाता है। ऑनलाइन first appeal के लिए अलग शुल्क नहीं लिया जाता।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
RTI और शिकायत की अपील एक चीज नहीं हैं
RTI का उद्देश्य सूचना और रिकॉर्ड हासिल करना है।
जबकि grievance appeal का उद्देश्य शिकायत के निस्तारण से असहमति जताना और उपलब्ध व्यवस्था के तहत उस निर्णय की समीक्षा मांगना है।
इसलिए केवल RTI दाखिल कर देने से आपकी मूल शिकायत अपने आप दोबारा जांच के लिए खुल जाएगी—ऐसा जरूरी नहीं है।
दोनों प्रक्रियाओं को जरूरत के अनुसार अलग-अलग इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
CPGRAMS जैसी शिकायत व्यवस्था में क्या करें?
अगर आपकी शिकायत CPGRAMS जैसे केंद्रीय grievance portal पर दर्ज है और आप उसके निस्तारण से संतुष्ट नहीं हैं, तो उपलब्ध appeal facility का इस्तेमाल किया जा सकता है।
ऐसी स्थिति में अपनी अपील में केवल यह लिखने के बजाय कि “रिपोर्ट गलत है”, यह स्पष्ट करना ज्यादा प्रभावी हो सकता है कि—
- शिकायत में आपने क्या आरोप/समस्या बताई थी।
- आपने कौन-कौन से दस्तावेज या सबूत दिए थे।
- निस्तारण रिपोर्ट में क्या कहा गया।
- रिपोर्ट में कौन-सी महत्वपूर्ण बात छूट गई।
- किस तथ्य या रिकॉर्ड की अनदेखी हुई।
- आप किस प्रकार की समीक्षा या कार्रवाई चाहते हैं।
इससे आपकी आपत्ति रिकॉर्ड पर स्पष्ट रूप से दर्ज होती है।
गंभीर मामलों में केवल grievance portal पर निर्भर न रहें
अगर मामला जमीन पर कब्जे, आपराधिक घटना, धमकी, राजस्व अधिकार या किसी अन्य गंभीर कानूनी अधिकार से जुड़ा है, तो केवल ऑनलाइन शिकायत के निस्तारण पर निर्भर रहना उचित नहीं हो सकता।
मामले की प्रकृति के अनुसार संबंधित वरिष्ठ अधिकारी, वैधानिक प्राधिकरण या न्यायिक मंच के सामने उपलब्ध उचित कानूनी उपाय अपनाए जा सकते हैं।
ऐसे मामलों में दस्तावेजों के साथ किसी योग्य कानूनी विशेषज्ञ से सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।
सबसे जरूरी बात—Paper Trail तैयार करें
अगर आपको लगता है कि आपकी शिकायत गलत रिपोर्ट लगाकर बंद कर दी गई है, तो केवल फोन पर बहस करने के बजाय पूरा paper trail तैयार करें।
पहला कदम: शिकायत और closure report का रिकॉर्ड सुरक्षित करें।
दूसरा कदम: RTI के जरिए जांच से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड मांगें।
तीसरा कदम: grievance portal पर उपलब्ध appeal/review mechanism का इस्तेमाल करें।
चौथा कदम: जरूरत पड़ने पर संबंधित वरिष्ठ अधिकारी या वैधानिक प्राधिकरण के सामने मामला रखें।
पांचवां कदम: गंभीर कानूनी मामलों में उपलब्ध न्यायिक या अन्य वैधानिक remedy पर विचार करें।
याद रखिए—किसी पोर्टल पर “Closed” लिखा होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि शिकायत पर की गई जांच सही थी या गलत। लेकिन केवल संदेह के आधार पर अधिकारी पर गलत रिपोर्ट लगाने का आरोप लगाने के बजाय पहले official records हासिल करना आपकी स्थिति को कहीं अधिक मजबूत बना सकता है।
अपने अधिकार जानिए, रिकॉर्ड संभालकर रखिए और हर शिकायत की प्रक्रिया का लिखित प्रमाण सुरक्षित रखिए।
