प्रलाछी स्कूल में 'बड़ा मंगल' पर भव्य सुंदरकांड और भंडारे का आयोजन; अनुपमा सिंह के समर्पण को अतिथियों ने सराहा

Grand Sunderkand and Bhandara organized on 'Bada Mangal' in Pralachi School; Guests appreciated Anupama Singh's dedication.
 
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लखनऊ (प्रवेश नगर): "जापर कृपा राम की होई, तापर कृपा करइ सब कोई।" इसी पावन चौपाई के साथ ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल के शुभ अवसर पर प्रलाछी स्कूल परिसर में एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्कूल की संस्थापिका अनुपमा सिंह जी के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में सुंदरकांड का सस्वर पाठ, महाआरती, भजन संध्या और विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। इस दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने प्रभु श्री राम और संकटमोचन हनुमान जी की भक्ति का रसास्वादन किया।

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मुख्य अतिथि मृत्युंजय चौबे सहित कई दिग्गज रहे मौजूद

धार्मिक अनुष्ठान में सर्वजन सनातन पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मृत्युंजय चौबे जी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके साथ ही स्थानीय पार्षद हरीश अवस्थी जी और आजाद मंच की प्रदेश अध्यक्ष रागिनी अवस्थी जी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य आयोजक विकास सिंह जी और सुमन सिंह जी (बहन) की सक्रिय भूमिका और गरिमामयी उपस्थिति रही।

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संस्थापिका अनुपमा सिंह के समर्पण की अतिथियों ने की प्रशंसा

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथियों ने स्कूल की संस्थापिका अनुपमा सिंह जी के व्यक्तित्व और बच्चों के प्रति उनके सेवा भाव की जमकर सराहना की।

अतिथियों का संदेश: अनुपमा जी बेहद सरल, सौम्य और सुशील स्वभाव की धनी हैं। स्कूल और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनका समर्पण समाज के लिए एक मिसाल है। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि वे अनुपमा जी को इतनी शक्ति प्रदान करें जिससे वह बच्चों के भविष्य को और बेहतर बना सकें। शिक्षा और समाज सेवा के इस पावन कार्य में हम सब हर मोड़ पर अनुपमा जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

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सुंदरकांड पाठ और भंडारे में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब

भजन संध्या और सुंदरकांड पाठ के दौरान पूरा परिसर 'जय श्री राम' और 'जय हनुमान' के जयकारों से गुंजायमान रहा। उपस्थित भक्तों ने भावविभोर होकर प्रभु की आरती की, जिसके बाद आयोजित विशाल भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ कमाया।

कार्यक्रम का समापन हनुमान जी के चरणों में इस प्रार्थना के साथ हुआ: "प्रबिसि नगर कीजे सब काजा, हृदयं राखि कोसलपुर राजा।"

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