गायत्री प्रज्ञा पीठ में वरिष्ठ साहित्यकार अतुल कपूर की दो पुस्तकों का भव्य विमोचन

Grand launch of two books by senior litterateur Atul Kapoor at Gayatri Pragya Peeth.
 
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पिहानी (हरदोई)/लखनऊ डेस्क (आर. एल. पाण्डेय)।
गायत्री प्रज्ञा पीठ, पिहानी में साहित्य प्रेमियों और प्रबुद्धजनों की गरिमामयी उपस्थिति में वरिष्ठ साहित्यकार अतुल कपूर की दो चर्चित कृतियों के द्वितीय संस्करण का भव्य विमोचन संपन्न हुआ। उनकी पुस्तक "2 इंच मुस्कान" तथा खंडकाव्य "मारुति" के लोकार्पण समारोह में प्रशासनिक, साहित्यिक और सामाजिक क्षेत्र की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता की।

प्रशासनिक एवं साहित्यिक जगत की रही गरिमामयी उपस्थिति


पुस्तकों का विमोचन संयुक्त रूप से पूर्व जिलाधिकारी अवधेश कुमार सिंह राठौर, संजीव श्रीवास्तव (संस्थापक, राष्ट्रीय प्रस्तावना), हरिनाथ (संपादक, राष्ट्रीय प्रस्तावना), प्रसिद्ध कवि अरुणेश मिश्रा, वरिष्ठ साहित्यकार भरत पांडेय, राम महेश मिश्रा (संस्थापक एवं अध्यक्ष, भाग्योदय फाउंडेशन) तथा प्रदीप त्यागी (महाप्रबंधक, हरियावां चीनी मिल) सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने किया।


साहित्यिक मूल्यों को समर्पित हैं दोनों कृतियां
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने अतुल कपूर के साहित्यिक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि "2 इंच मुस्कान" हास्य-व्यंग्य की कविताओं के माध्यम से आधुनिक समाज के मानवीय रिश्तों, संवेदनाओं और जीवन की विविध मनोदशाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। वहीं खंडकाव्य "मारुति" भगवान हनुमान के व्यक्तित्व, भक्ति, शक्ति और सनातन सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी के समक्ष प्रेरक रूप में प्रस्तुत करता है।
समारोह में पिहानी एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साहित्यकार, लेखक, पत्रकार और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान अतुल कपूर को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।


पूर्व जिलाधिकारी अवधेश कुमार सिंह राठौर को मिला 'रसखान स्मृति सम्मान'


कार्यक्रम के अवसर पर रसखान शोध संस्थान की ओर से हरदोई के पूर्व जिलाधिकारी एवं प्रख्यात कवि अवधेश कुमार सिंह राठौर को 'रसखान स्मृति सम्मान' से सम्मानित किया गया। उन्हें अंगवस्त्र ओढ़ाकर तथा स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।


इस अवसर पर वक्ताओं ने बताया कि रसखान शोध संस्थान के प्रस्ताव पर पूर्व जिलाधिकारी अवधेश कुमार सिंह राठौर ने हरदोई में नव-निर्मित प्रेक्षागृह का नाम 'रसखान प्रेक्षागृह' किए जाने के लिए शासन को संस्तुति भेजी थी, जिसके बाद इस नामकरण को स्वीकृति मिली। उनके इस योगदान की भी कार्यक्रम में विशेष सराहना की गई।

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