मध्य पूर्व में महासंग्राम, खामेनेई की मौत और दस देश एक साथ निशाने पर

Great conflict in the Middle East, Khamenei's death, and ten countries targeted simultaneously
 
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(ओंकारेश्वर पांडेय – विभूति फीचर्स)
नोट: निम्न घटनाक्रम अत्यंत गंभीर अंतरराष्ट्रीय दावों से जुड़ा है। ऐसे मामलों में विभिन्न पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक होती है।
28 फरवरी 2026 की सुबह मध्य पूर्व में अभूतपूर्व सैन्य टकराव की खबरों के साथ शुरू हुई। रिपोर्टों के अनुसार United States और Israel ने Iran के ठिकानों पर संयुक्त कार्रवाई की। इसके बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव तेज़ी से फैल गया।
1 मार्च को ईरानी सरकारी मीडिया ने सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के निधन की पुष्टि की। उनकी उम्र 86 वर्ष थी। ईरान में 40 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई और तेहरान सहित कई शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर तीखी प्रतिक्रिया दी। वहीं ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने क्षेत्रीय जवाबी कार्रवाई की घोषणा की।

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होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट

Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की प्रमुख धुरी है, जहां से विश्व के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20–30% गुजरता है। ईरान द्वारा इसके बंद करने की घोषणा से वैश्विक बाज़ारों में उथल-पुथल मच गई। विशेषज्ञों ने कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका जताई।

दस देशों में हमले का दावा

ईरान समर्थित कार्रवाई के दावों में Bahrain, Qatar, Kuwait, United Arab Emirates, Saudi Arabia, Jordan, Iraq और स्वयं Israel शामिल बताए गए।
अमेरिका ने अपने सैनिकों के सुरक्षित होने का दावा किया, जबकि ईरानी मीडिया ने नागरिक हताहतों की जानकारी दी। स्वतंत्र पुष्टि सीमित रही।

वैश्विक प्रतिक्रिया

China ने सैन्य कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए तत्काल युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की अपील की। संयुक्त राष्ट्र में चीन के प्रतिनिधि ने वार्ता के दौरान हमले को “चौंकाने वाला” बताया। Russia ने इसे “कूटनीति का विश्वासघात” कहा और राजनीतिक समाधान पर लौटने की मांग की।

अमेरिका के भीतर मतभेद

अमेरिका में भी राजनीतिक विभाजन सामने आया। उपराष्ट्रपति Kamala Harris ने संभावित “रिजीम चेंज वॉर” का विरोध किया, जबकि राष्ट्रपति Donald Trump ने कठोर रुख बनाए रखा।

भारतीयों पर असर

क्षेत्रीय संघर्ष के कारण India सहित कई देशों की उड़ानें प्रभावित हुईं। रिपोर्टों के अनुसार ईरान, इज़राइल, इराक, कुवैत, क़तर, बहरीन, यूएई, जॉर्डन, लेबनान, सऊदी अरब और ओमान के एयरस्पेस पर प्रतिबंध लगे। खाड़ी देशों में रह रहे लगभग 1.5 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी।  विदेश मंत्री S. Jaishankar ने ईरान और इज़राइल के समकक्षों से बातचीत कर संयम और संवाद की अपील की।

व्यापक संदर्भ

इस घटनाक्रम की तुलना हाल की अमेरिकी कार्रवाइयों से भी की जा रही है, जिनमें Nicolas Maduro से जुड़ा विवाद शामिल है। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक शक्ति संतुलन नए मोड़ पर है।
क्या युद्ध शांति ला सकता है?
इतिहास बताता है कि युद्ध प्रायः और बड़े संघर्षों को जन्म देता है। ऐसे समय में Mahatma Gandhi का यह कथन फिर याद आता है— आँख के बदले आँख पूरी दुनिया को अंधा बना देगी।” आज जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है, ऊर्जा आपूर्ति संकट में है और वैश्विक कूटनीति परीक्षा में है, तब प्रश्न यही है—क्या समाधान मिसाइलों में है या संवाद में?

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