फाइटोवोल्टेज से हरित ऊर्जा: पेड़ों से बिजली बनाने का अनूठा मॉडल

आशीष कुमार का मॉडल पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वच्छ और हरित ऊर्जा की संभावनाओं को दर्शाता है

 
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मॉडल का नाम: फाइटोवोल्टेज से हरित ऊर्जा
मॉडल प्रस्तुतकर्ता: आशीष कुमार

मेरा मॉडल ‘फाइटोवोल्टेज से हरित ऊर्जा’ पेड़ों और मिट्टी की सहायता से पर्यावरण के अनुकूल बिजली उत्पन्न करने की अवधारणा पर आधारित है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक प्रक्रियाओं का उपयोग करके स्वच्छ ऊर्जा के प्रति लोगों को जागरूक करना और हरित ऊर्जा की संभावनाओं को प्रदर्शित करना है।

इस मॉडल का सिद्धांत यह है कि जीवित पेड़ प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया से ग्लूकोज बनाते हैं। इस प्रक्रिया में बने कार्बनिक पदार्थों का कुछ हिस्सा जड़ों के माध्यम से मिट्टी में पहुंचता है। मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव इन पदार्थों को विघटित करते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉन मुक्त हो सकते हैं। उपयुक्त इलेक्ट्रोड और विद्युत परिपथ की सहायता से इनके बीच विद्युत विभवांतर उत्पन्न किया जा सकता है।

मॉडल बनाने में आवश्यक सामग्री

इस मॉडल को तैयार करने के लिए गमले में लगा एक पौधा, तांबे और जस्ते की पट्टियां, विद्युत तार तथा एलईडी की आवश्यकता होती है। दोनों धातु की पट्टियों को गीली मिट्टी में लगाया जाता है और तारों की मदद से विद्युत परिपथ तैयार किया जाता है। इस व्यवस्था में लगभग एक वोल्ट तक वोल्टेज मिल सकता है, हालांकि वास्तविक परिणाम मिट्टी की नमी, इलेक्ट्रोड की स्थिति और उनकी धातु सहित कई कारकों पर निर्भर करते हैं। एक से अधिक गमलों को उपयुक्त तरीके से जोड़कर वोल्टेज या विद्युत धारा बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है, जिससे एलईडी जलाने का प्रदर्शन किया जा सके।

हरित ऊर्जा की दिशा में एक पहल

यह मॉडल कम लागत में तैयार किया जा सकता है और विद्यार्थियों को पौधों, मिट्टी के सूक्ष्मजीवों तथा विद्युत ऊर्जा के बीच संबंध समझने का अवसर देता है। यह पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक सोच और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक उपयोगी उदाहरण है। ‘फाइटोवोल्टेज से हरित ऊर्जा’ के माध्यम से आशीष कुमार ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि प्रकृति में मौजूद प्रक्रियाओं को समझकर भविष्य के लिए स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े नए विचार विकसित किए जा सकते हैं।

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