हनुमान चालीसा से हुआ कथा का शुभारंभ, हरिनाम संकीर्तन पर झूम उठे हजारों भक्त
लखनऊ। श्री राधा रमण सेवा समिति के तत्वावधान में डी.ए.वी. कॉलेज, पं. रास बिहारी तिवारी मार्ग, ऐशबाग में चल रही श्रीमद्भागवत राधा रमण कथा के तीसरे दिन कथा स्थल भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। पूज्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज के आगमन से पहले श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। हनुमान जी के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया।
महाराज जी के कथा स्थल पर पहुंचने के बाद “हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा, हरे हरे। हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे” महामंत्र के साथ “जय जय राधा रमण, हरि बोल” का संकीर्तन हुआ। हरिनाम संकीर्तन शुरू होते ही पंडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। राधा रमण के जयकारों और हरिनाम की गूंज से पूरा वातावरण आध्यात्मिक उल्लास से भर गया।
कथा में हनुमान जी की उपस्थिति को बताया मंगलकारी
श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने कहा कि कथा में हनुमान जी की उपस्थिति अत्यंत मंगलकारी मानी जाती है। उन्होंने कहा कि कथा परंपरा में हनुमान जी व्यास जी के कथा प्रारंभ करने से पहले विराजमान होते हैं और आरती के बाद ही विदा होते हैं।उन्होंने कहा कि हनुमान जी की उपस्थिति कथा में भक्ति, शक्ति और भगवान के प्रति समर्पण का भाव जागृत करती है।
पितृ पक्ष की एकादशी पर बताया श्राद्ध का महत्व
पितृ पक्ष के संदर्भ में महाराज जी ने एकादशी तिथि के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि पितृ पक्ष में अपनी-अपनी तिथि के अनुसार पितरों का श्राद्ध करना चाहिए और श्रद्धापूर्वक ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में भोजन केवल स्वयं ग्रहण करने की वस्तु नहीं है, बल्कि पहले उसे भगवान को समर्पित करने की भावना है। इसलिए श्री ठाकुर जी को भोग अर्पित करने के बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। भगवान को समर्पित किया गया भोजन प्रसाद बन जाता है और प्रसाद ग्रहण करना भी भक्तिभाव की साधना का हिस्सा है।
हजारों श्रद्धालुओं ने किया कथा का रसपान
कथा में यजमान अमरनाथ मिश्र, राजेंद्र कुमार अग्रवाल, अनिल कुमार अग्रवाल, लोकेश अग्रवाल, रोहित अग्रवाल, अमित अग्रवाल, समीर मित्तल, नवीन गुप्ता, अनुराग मिश्रा, आनंद रस्तोगी, शिवम अग्रवाल, सुनील कुमार मिश्रा, मनोज राय, कुश मिश्रा, दिव्यांशु शुक्ला और साकेत शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु परिवार सहित मौजूद रहे।
हजारों की संख्या में भक्तों ने कथा स्थल पर पहुंचकर आध्यात्मिक एवं भक्तिमय वातावरण में कथा का आनंद लिया। कथा के समापन पर विधिवत आरती की गई और इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों ने संभाली व्यवस्था
कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डिवीजनल वार्डेन सुनील शुक्ला, डॉ. दिनेश माथुर, नफीस, मुशीर अहमद और मजीद अली सहित स्वयंसेवकों ने पंडाल की व्यवस्था के साथ यातायात संचालन को भी सुचारु बनाए रखा।आयोजकों ने कथा में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं, यजमानों, स्वयंसेवकों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

