Hardoi: "गूगल सूचना दे सकता है, संस्कार केवल शिक्षक ही दे सकता है" आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में बोले डॉ. राम मनोहर, शिक्षकों को बताया राष्ट्र निर्माण का शिल्पी
हरदोई, 06 जून 2026: जनपद के अल्लीपुर स्थित पं. बाबूराम त्रिवेदी सरस्वती शिशु मंदिर में चल रहे नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के चतुर्थ दिवस (चौथे दिन) पर नव-नियुक्त शिक्षकों के लिए विभिन्न व्यावहारिक और वैचारिक प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर रहे, जिन्होंने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण और चरित्र निर्माण के प्रति उनके वास्तविक दायित्वों का बोध कराया।
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन, पुष्पार्चन और अतिथियों के भव्य स्वागत के साथ हुआ। मंच का कुशल संचालन मैगलगंज के प्रधानाचार्य उत्तम मिश्र ने किया, जबकि अतिथियों का परिचय जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक मिथिलेश अवस्थी ने कराया। इस दौरान अल्लीपुर डिग्री कॉलेज के प्राचार्य शशिकांत पांडेय ने मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
"शिक्षा ज्ञान देती है और धर्म करुणा" — 'हमारा लक्ष्य' पर गहरा चिंतन
प्रशिक्षण के प्रथम एवं द्वितीय सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. राम मनोहर ने “हमारा लक्ष्य” विषय पर एक अत्यंत प्रेरणादायी और वैचारिक सत्र लिया। उन्होंने मानव जीवन और आज की आधुनिक शिक्षा पद्धति पर विचार रखते हुए कहा:मानव जीवन को मुख्य रूप से दो सबसे बड़ी शक्तियां नियंत्रित करती हैं—शिक्षा और धर्म। शिक्षा जहाँ व्यक्ति को बौद्धिक ज्ञान प्रदान करती है, वहीं धर्म उसके जीवन में करुणा, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का विकास करता है। आज के इस तकनीकी युग में गूगल (Google) और मोबाइल फोन बच्चों को केवल सूचनाएं (Information) तो दे सकते हैं, लेकिन जीवन जीने के संस्कार, चरित्र निर्माण और उच्च मूल्यों का संचार केवल एक जीवंत शिक्षक ही कर सकता है।"
उन्होंने आगे कहा कि 'आचार्य' होना केवल एक पद, नौकरी या आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह एक महान विचार और जीवन पद्धति है। समाज एक शिक्षक से केवल किताबों के ज्ञान की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि उसके आचरण, व्यक्तित्व और आदर्शों से भी प्रेरणा लेता है।

उंगलियों के माध्यम से कराया 'विद्या भारती के लक्ष्य' का अभ्यास
डॉ. राम मनोहर ने भारतीय संस्कृति और धर्म की व्यापक व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि धर्म किसी संप्रदाय विशेष का नाम नहीं, बल्कि जीवन को सही और अनुशासित दिशा देने वाली एक सुंदर व्यवस्था है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी जिस धर्म की स्थापना की बात कही थी, वह स्थापना किसी भवन में नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के अंतर्मन में होती है।
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संगठन का मूल मंत्र: उन्होंने प्रशिक्षुओं को विद्या भारती के 'हमारा लक्ष्य' का महत्व समझाते हुए कहा कि यह संगठन की आत्मा है।
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अनोखा प्रयोग: सत्र के दौरान उन्होंने एक विशेष पद्धति से उंगलियों के माध्यम से सभी को लक्ष्य का व्यावहारिक अभ्यास कराया और इसे कंठस्थ करने के लिए प्रेरित किया। उनके इस अनूठे मार्गदर्शन का असर यह हुआ कि सत्र की समाप्ति तक अधिकांश प्रशिक्षणार्थियों को संगठन का यह मूल लक्ष्य पूरी तरह स्मरण हो गया।
विषय-वार कक्षा शिक्षण का भी मिला प्रशिक्षण
वैचारिक सत्रों के अतिरिक्त, आचार्यों को कक्षा के भीतर विद्यार्थियों को रोचक ढंग से पढ़ाने की बारीकियों से भी अवगत कराया गया। कक्षा शिक्षण प्रशिक्षण के अंतर्गत विभिन्न संभाग निरीक्षकों और विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी:
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गणित शिक्षण: संभाग निरीक्षक श्याम मनोहर शुक्ल द्वारा।
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सामाजिक विज्ञान: संभाग निरीक्षक रणवीर सिंह द्वारा।
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अंग्रेजी विषय: आशुतोष तिवारी द्वारा।
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विज्ञान शिक्षण: अतुल अवस्थी द्वारा।
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हिंदी शिक्षण: दीपक पांडेय द्वारा।
"विश्व का कल्याण हो" के उद्घोष से गूंजा परिसर
सत्र के अंत में मुख्य अतिथि ने सभी आचार्यों को राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और मूल्यों से युक्त शिक्षा प्रदान करने का संकल्प दिलाया। पूरा परिसर “धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो” के सामूहिक उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

इस गरिमामयी अवसर पर जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के उपाध्यक्ष एवं विद्यालय प्रबंधक शीर्षेन्दुशील त्रिवेदी, वर्गाधिकारी संतोष त्रिवेदी, लखनऊ संभाग निरीक्षक श्याम मनोहर शुक्ल, सीतापुर संभाग निरीक्षक रणवीर सिंह, श्रावस्ती संभाग निरीक्षक कैलाश चंद्र वर्मा सहित क्षेत्र के अनेक शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित

