Hardoi News: मझिया के कुल्लही में मुख्य सड़क की अनदेखी से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, निजी रास्तों पर मेहरबानी पर उठे सवाल

Hardoi News: Villagers in Kullahi (Majhiya) outraged over neglect of the main road; questions raised regarding preferential treatment for private paths.
 
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Kulhi Village Road Issue Hardoi: हरदोई जिले के विकासखंड हरियावां की ग्राम पंचायत मझिया के मजरा कुल्लही में विकास कार्यों में अनियमतताओं को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। गांव की मुख्य सड़क लंबे समय से बदहाली का दंश झेल रही है। पूरी सड़क कीचड़ और जलभराव से लबालब है, जिससे स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और किसानों का राह चलना दूभर हो गया है।

 मुख्य सड़क बदहाल, निजी रास्तों पर सरकारी धन खर्च का आरोप

ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस सार्वजनिक मुख्य सड़क का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए था, उसकी लगातार अनदेखी की जा रही है।

आरोप है कि पूरे गांव के इस्तेमाल में आने वाली सड़क को छोड़ कर कुछ लोगों की सहूलियत के लिए व्यक्तिगत/निजी रास्तों पर सरकारी बजट खर्च किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में यह भेदभाव समझ से परे है और जनहित की सीधी उपेक्षा है।

 BNS की धारा 316 के तहत कार्रवाई का बन सकता है आधार

ग्रामीणों की मानें तो उन्होंने इस समस्या के संबंध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ग्रामीणों के आरोप सही सिद्ध होते हैं, तो यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316 (लोक सेवक द्वारा अपने कर्तव्य का जानबूझकर उल्लंघन) तथा पंचायती राज नियमों के तहत सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है। जाँच में दोषी पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों पर विभागीय व विधिक कार्रवाई हो सकती है।

 जिला प्रशासन से निष्पक्ष जाँच की माँग

कुल्लही के निवासियों ने हरदोई जिला प्रशासन से अपील की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जाँच कराई जाए। ग्रामीणों ने माँग की है कि निजी रास्तों के बजाय मुख्य सड़क का निर्माण प्राथमिकता से कराया जाए, ताकि उन्हें नारकीय जीवन से मुक्ति मिल सके।गांव की मुख्य सड़क का बदहाल होना और विकास कार्यों में पक्षपात के आरोप सीधे तौर पर पंचायती राज व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कड़ा कदम उठाता है।

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