Haridwar News: हर की पौड़ी स्थित गुरु रविदास मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए संत निर्मल दास जी ने CM धामी को सौंपा ज्ञापन
Guru Ravidas Temple Haridwar Beautification: श्री गुरु रविदास साधु संप्रदाय सोसाइटी (पंजाब) के प्रधान संत निर्मल दास जी महाराज ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर हरिद्वार स्थित ऐतिहासिक गुरु रविदास मंदिर और घाट के कायाकल्प की मांग की है।
मुख्यमंत्री धामी ने 30 जुलाई 2026 को हरिद्वार जिले की भगवानपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चुड़ियाला का दौरा किया था। वहां संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित 'कलश वंदन' तथा 'समरसता संकल्प अभियान' के शुभारंभ अवसर पर संत निर्मल दास जी ने उन्हें एक ज्ञापन पत्र सौंपा।
ज्ञापन में की गई मुख्य मांगें
-
मंदिर का सौंदर्यीकरण: हर की पौड़ी स्थित श्री गुरु रविदास जी मंदिर के आसपास स्वच्छता व्यवस्था दुरुस्त करने और परिसर का जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण कराने की मांग।
-
गुरु रविदास घाट का विकास: बिरला घाट के निकट स्थित 'श्री गुरु रविदास घाट' का आधुनिक एवं भव्य तरीके से कायाकल्प किया जाए।
संत निर्मल दास जी ने मुख्यमंत्री को बताया कि उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अलावा कनाडा, इटली, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु (संगत) हर साल हरिद्वार आते हैं। ये श्रद्धालु गंगा स्नान के साथ-साथ गुरु रविदास जी के सत्संग और विचारों से जुड़ते हैं।
मन चंगा तो कठौती में गंगा" - पवित्र कथा का उल्लेख
मुलाकात के दौरान संत निर्मल दास जी ने गुरु रविदास जी और माँ गंगा से जुड़ी उस प्रसिद्ध अमर कथा का भी स्मरण कराया जिसने "मन चंगा तो कठौती में गंगा" कहावत को जन्म दिया। जब एक पंडित काशी से गंगा स्नान कर लौटे और गुरु रविदास जी की भेंट अर्पित की, तो माँ गंगा ने प्रकट होकर एक बहुमूल्य कंगन उपहार में दिया। राजा और पंडित जब दूसरे कंगन की चाह में संत रविदास जी की कुटिया पहुंचे, तो गुरुजी ने अपनी चमड़ा सुखाने/धोने वाली कठौती (पानी के पात्र) से ही माँ गंगा का आह्वान किया और कठौती में ही गंगा की धारा और अनगिनत कंगन प्रकट हो गए।
समानता और मानवता का केंद्र है हरिद्वार
हरिद्वार में गंगा नदी के पावन तट पर संत शिरोमणि गुरु रविदास जी से जुड़े अनेक आश्रम, घाट और मंदिर स्थित हैं। ये स्थल उनके समानता, सामाजिक समरसता और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाते हैं।संत निर्मल दास जी ने उम्मीद जताई कि प्रदेश सरकार इन ऐतिहासिक स्थलों का सौंदर्यीकरण कर देश-विदेश से आने वाली संगतों के लिए सुविधाओं में विस्तार करेगी।


