नवाचार से विज्ञान को आसान बना रहे राज्य पुरस्कृत शिक्षक हरिश्चंद्र सिंह चौहान

State-awarded teacher Harishchandra Singh Chauhan is making science easier through innovation.
 
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लखनऊ। बख्शी का तालाब इण्टर कॉलेज, लखनऊ के विज्ञान शिक्षक हरिश्चंद्र सिंह चौहान ने अपने नवाचारी शिक्षण के जरिए विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करने की मिसाल कायम की है। उनका मानना है कि विज्ञान केवल किताबों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसे प्रयोग, मॉडल और गतिविधियों के माध्यम से समझाया जाए तो बच्चे उसे आसानी से सीखने के साथ-साथ अपनी रचनात्मक क्षमता भी विकसित कर सकते हैं।

राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित हरिश्चंद्र सिंह चौहान कक्षा में पारंपरिक शिक्षण पद्धति के साथ नवाचार को विशेष महत्व देते हैं। वह विद्यार्थियों को विज्ञान के विभिन्न सिद्धांतों को मॉडल और प्रयोगों के माध्यम से समझाने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थी विज्ञान से जुड़े नए मॉडल तैयार करते हैं और अपनी कल्पनाओं को प्रोजेक्ट के रूप में सामने लाते हैं। उनकी नवाचारी शिक्षण पद्धति को लेकर पूर्व में भी विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में चर्चा हुई है।

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INSPIRE योजना के लिए विद्यार्थियों को करते हैं तैयार

हरिश्चंद्र सिंह चौहान विद्यार्थियों को भारत सरकार की INSPIRE Award MANAK योजना के लिए भी तैयार करते हैं। उनका प्रयास रहता है कि बच्चे अपने आसपास की समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें और उनके समाधान के लिए नए विचार विकसित करें।

विद्यालय में उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों के नवाचारी मॉडल तैयार किए जाते हैं और चयनित मॉडलों को योजना के लिए भेजा जाता है। वर्ष 2025-26 में भी बख्शी का तालाब इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों का INSPIRE Award MANAK के लिए चयन हुआ और चयनित प्रत्येक विद्यार्थी को मॉडल एवं नवाचार को विकसित करने के लिए 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दिए जाने की जानकारी सामने आई थी।

विज्ञान शिक्षक के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों की उपलब्धियां केवल INSPIRE योजना तक सीमित नहीं हैं। विज्ञान क्विज, मॉडल प्रदर्शनी और अन्य गतिविधियों में भी विद्यार्थी लगातार प्रतिभाग कर रहे हैं। मई 2026 में विद्यालय में विज्ञान एवं विश्व विरासत विषय पर क्विज तथा INSPIRE Award MANAK से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन भी हुआ था।

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पढ़ाई के साथ सर्वांगीण विकास पर जोर

हरिश्चंद्र सिंह चौहान का प्रयास केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं है। वह विद्यार्थियों को विद्यालय समय के अतिरिक्त समय देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हैं और उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका मानना है कि एक शिक्षक का दायित्व केवल विषय पढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन में सही दिशा दिखाना भी है।

उनके लिए प्रत्येक विद्यार्थी में छिपी प्रतिभा को पहचानना और उसे आगे बढ़ने का अवसर देना शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इसी सोच के साथ वह बच्चों को प्रश्न पूछने, प्रयोग करने, असफलताओं से सीखने और कुछ नया करने के लिए प्रेरित करते हैं।

बख्शी का तालाब इंटर कॉलेज लंबे समय से क्षेत्र में शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और विद्यालय में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ऐसे वातावरण में नवाचारी शिक्षण पद्धति विद्यार्थियों को किताबों से आगे बढ़कर सीखने का अवसर देती है।

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‘सीखो, सोचो और कुछ नया करो’ है मूल मंत्र

हरिश्चंद्र सिंह चौहान का शिक्षण दर्शन उनके सरल लेकिन प्रभावी मंत्र में दिखाई देता है—“सीखो, सोचो और कुछ नया करो।”उनका मानना है कि अच्छी शिक्षा केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करने का आधार है जो समाज और देश के विकास में अपनी भूमिका निभा सकें। विज्ञान के प्रति जिज्ञासा, प्रयोग करने की आदत और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती है।

उनके अनुसार, “शिक्षक केवल पढ़ाता नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का कार्य करता है। अच्छी शिक्षा से ही सशक्त समाज और समृद्ध भारत का निर्माण संभव है।” इसी विचार को अपने शिक्षण का आधार बनाकर हरिश्चंद्र सिंह चौहान विद्यालय के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार की भावना विकसित करने के प्रयास में जुटे हैं।

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