Hastinapur Ke Veer: सेट पर भी 'पितामह' बने मनीष वाधवा, युवा स्टार्स के साथ ऑफ-स्क्रीन बॉन्डिंग पर खोला बड़ा राज
मुंबई: सोनी सब अपने दर्शकों के लिए एक भव्य और अनोखी पौराणिक गाथा 'हस्तिनापुर के वीर' लेकर आया है, जो महाभारत के किरदारों यानी पांडवों और कौरवों के बचपन और उनके शुरुआती वर्षों के जीवन पर आधारित है। यह शो उन अनकहे रिश्तों, भावनाओं और फैसलों को दिखाता है, जिन्होंने आगे चलकर हस्तिनापुर की तकदीर लिखी। 2 जून से शुरू हो चुके इस भव्य धारावाहिक में हस्तिनापुर के संरक्षक भीष्म पितामह का मुख्य और प्रतिष्ठित किरदार निभा रहे हैं दिग्गज अभिनेता मनीष वाधवा। अपनी बेमिसाल ताकत, त्याग और अटूट कर्तव्यनिष्ठा के लिए भीष्म के रूप में वे शो में गंभीरता और ज्ञान का संचार कर रहे हैं।
ऑन-स्क्रीन गाइड, ऑफ-स्क्रीन मेंटर
कहानी के अनुसार जहाँ भीष्म पितामह हस्तिनापुर के युवा राजकुमारों के मार्गदर्शक और गुरु हैं, वहीं ऑफ-स्क्रीन (सेट के पीछे) भी मनीष वाधवा का यही रूप देखने को मिल रहा है। वे पांडवों और कौरवों की भूमिका निभा रहे सभी बाल और युवा कलाकारों के लिए असल जिंदगी में भी एक सच्चे मेंटर बन चुके हैं।
शो की युवा कास्ट, जिसमें युधिष्ठिर (अथर खान), भीम (सुभाष खत्री), अर्जुन (उर्वा सवालिया), नकुल (हरित गबानी), सहदेव (मयंक यादव), दुर्योधन (अय्युध भानुशाली) और दुःशासन (शौर्य उपाध्याय) शामिल हैं, का मनीष वाधवा के साथ बेहद सहज, सम्मानजनक और गर्मजोशी भरा रिश्ता बन गया है।
शूटिंग के बीच सिखाते हैं एक्टिंग के गुर
सूटिंग और रिहर्सल्स के बीच मिलने वाले खाली समय में मनीष अक्सर इन युवा कलाकारों को किरदारों के इमोशन्स को बारीकी से समझने में मदद करते हैं। वे बच्चों को डायलॉग डिलीवरी (संवादों के उतार-चढ़ाव) पर जरूरी टिप्स देते हैं और पौराणिक कथाओं से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा करते हैं, ताकि ये बाल कलाकार पौराणिक काल की उस दुनिया से खुद को गहराई से जोड़ सकें। मनीष वाधवा का शांत स्वभाव और उनका गहरा अनुभव पूरी टीम के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
ऑफ-स्क्रीन भी सब मुझे 'पितामह' कहते हैं" — मनीष वाधवा
इस खूबसूरत रिश्ते और सेट के माहौल पर खुलकर बात करते हुए अभिनेता मनीष वाधवा ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा इस खूबसूरत सफर के दौरान मुझे इस बात का अहसास हुआ है कि कैमरे के पीछे भी इन युवा कलाकारों के साथ मेरा रिश्ता बिल्कुल वैसा ही गर्मजोशी और मार्गदर्शन भरा हो गया है, जैसा ऑन-स्क्रीन है। इन बच्चों की सबसे कमाल की बात यह है कि ये सीखने के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं। वे बहुत ध्यान से चीजों को देखते हैं, सवाल पूछते हैं और सीन को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं, जो इस उम्र में देखना वाकई अद्भुत है। हम सेट पर पौराणिक विषयों पर चर्चा करते हैं, बातें करते हैं और ढेर सारा हँसी-मज़ाक भी करते हैं। स्थिति यह है कि अब ऑफ-स्क्रीन भी कई लोग सेट पर मुझे ‘पितामह’ कहकर ही पुकारने लगे हैं, जो मेरे दिल के बेहद करीब है। इन बच्चों की सकारात्मक ऊर्जा हर दिन सेट को जीवंत बनाए रखती है।"
कब और कहाँ देखें?
अगर आप भी इतिहास की इस अनसुनी और भव्य गाथा के साक्षी बनना चाहते हैं, तो देखना न भूलें 'हस्तिनापुर के वीर', हर सोमवार से शनिवार रात 9 बजे, सिर्फ सोनी सब (Sony SAB) पर।
