हस्तिनापुर के वीर: दिव्यांका त्रिपाठी, जूही परमार और श्रद्धा आर्या ने बताया आज की पैरेंटिंग में क्यों जरूरी हैं महाभारत की सीखें

The Heroes of Hastinapur: Divyanka Tripathi, Juhi Parmar, and Shraddha Arya Explain—Why the Lessons of the Mahabharata Are Essential in Modern Parenting
 
nu9ou

मुंबई, मई 2026: हर दौर के माता-पिता के सामने बच्चों की परवरिश (Parenting) को लेकर अपनी अलग चुनौतियाँ होती हैं। आज के समय में दूसरों से तुलना, समाज की अनगिनत राय और अपने हर फैसले को सही साबित करने का दबाव पैरेंट्स पर साफ देखा जा सकता है। ऐसे में सोनी सब (Sony SAB) का आगामी पौराणिक शो 'हस्तिनापुर के वीर' महाभारत की उन कालजयी कहानियों को पर्दे पर लाने जा रहा है, जो आज के आधुनिक दौर में भी पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों को समझने का एक नया नजरिया देती हैं।

हाल ही में टेलीविजन जगत की तीन दिग्गज अभिनेत्रियाँ— दिव्यांका त्रिपाठी, जूही परमार और श्रद्धा आर्या एक साथ आईं। उन्होंने साझा किया कि कैसे महाभारत के किरदार और उनकी सीखें आज के समय में भी एक माँ के फैसलों को सही दिशा दिखा सकती हैं।

बच्चों की तुलना के दबाव पर क्या बोलीं दिव्यांका त्रिपाठी?

आज के समाज में बच्चों के बीच होने वाली तुलना पर चिंता व्यक्त करते हुए दिव्यांका त्रिपाठी ने कहा:आजकल बच्चा पैदा होने से पहले ही उसकी दूसरों से तुलना शुरू हो जाती है। एक माँ के तौर पर यह सोच मुझे डराती है कि मैं अपने बच्चे को इस जजमेंटल दुनिया से कैसे बचाऊँगी। ऐसे में मुझे माता कुंती के विचार याद आते हैं। कुंती ने कभी अपने बेटों की आपस में तुलना नहीं की। उन्होंने युधिष्ठिर की बुद्धिमत्ता, भीम की शक्ति, अर्जुन के फोकस और नकुल-सहदेव के आपसी संतुलन को अलग-अलग पहचाना और उन्हें निखारा। मेरे लिए पैरेंटिंग यही है कि बच्चे को किसी और जैसा बनाने के बजाय, उसे खुद का सर्वश्रेष्ठ संस्करण (Best Version) बनने के लिए प्रेरित किया जाए।”

डिजिटल दौर और परवरिश पर जूही परमार के विचार

अपनी बेटी समायरा के साथ खूबसूरत बॉन्डिंग के लिए मशहूर अभिनेत्री जूही परमार ने डिजिटल दौर की चुनौतियों पर बात की:लोग सोशल मीडिया पर मेरी और समायरा की रील्स को बहुत पसंद करते हैं। हमारा रिश्ता दोस्तों जैसा है, लेकिन पैरेंटिंग सिर्फ रील्स तक सीमित नहीं है। बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं, माँ को उनका रक्षक भी बनना पड़ता है। महाभारत से मैंने सीखा है कि बच्चों को पालते समय हम अपनी आँखों पर 'गांधारी जैसी पट्टी' नहीं बाँध सकते। दुर्योधन प्रतिभाशाली था, लेकिन सही मार्गदर्शन और सही-गलत की समझ न होने के कारण वह भटक गया। इसलिए पैरेंट्स को अपने बच्चों की दुनिया को करीब से समझना होगा और हर कदम पर उनका सही मार्गदर्शन करना होगा।”

'बाहरी शोर' और मातृत्व पर श्रद्धा आर्या का नजरिया

हाल ही में मातृत्व के सफर से जुड़ीं श्रद्धा आर्या ने समाज से मिलने वाली बिन-मांगी सलाहों पर अपने अनुभव साझा किए:हर नई माँ इस बात से सहमत होगी कि बच्चे के आने के बाद बधाई संदेशों के साथ-साथ हर तरफ से सुझावों की बाढ़ आ जाती है। कपड़ों से लेकर खान-पान तक, हर कोई अपनी राय देने लगता है। इस शोर के बीच मुझे गुरु द्रोणाचार्य की वह परीक्षा याद आई, जहाँ अर्जुन का पूरा ध्यान सिर्फ चिड़िया की आँख पर था। माँ बनने के लिए भी हमें इसी अर्जुन जैसे फोकस की जरूरत है। दुनिया चाहे जो भी टिप्पणियां करे, एक माँ को बाहरी शोर को भूलकर अपने दिल की आवाज सुननी चाहिए। माँ का दिल ही बच्चे के लिए सबसे पुराना और भरोसेमंद जीपीएस (GPS) होता है।”

कब और कहाँ देखें?

महाभारत के इन मानवीय और भावनात्मक पहलुओं को करीब से देखने के लिए तैयार हो जाइए। नया शो 'हस्तिनापुर के वीर', आगामी 2 जून से, हर सोमवार से शनिवार रात 9:00 बजे, सिर्फ सोनी सब पर प्रसारित किया जाएगा।

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