1 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को पाने में हेल्थकेयर सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका

The healthcare sector plays a crucial role in achieving the target of a $1 trillion economy.
 
The healthcare sector plays a crucial role in achieving the target of a $1 trillion economy.

24 जनवरी 2026, लखनऊ  भारत में एमएसएमई अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। स्वास्थ्य सेवा उद्योग में एमएसएमई की भूमिका और भी महत्वपूर्ण है, जहां अस्पताल, क्लिनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर, फार्मास्यूटिकल कंपनियां और मेडिकल इक्विपमेंट सप्लायर्स जैसे उद्यम शामिल हैं। इन उद्यमों को विकास के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है लेकिन बैंकिंग और वित्तीय चुनौतियों के कारण क्रेडिट प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है। इस जरूरत को समझते हुए पीएचडीसीसीआई द्वारा इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चल रहे यूपीआईटेक्स कार्यक्रम के दूसरे दिन क्रेडिट फैसेलिटीज स्कीम फॉर एमएसएमई इन हेल्थकेयर इंडस्ट्रीज विषय पर कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।

इस पैनल में डॉ रंजीत मेहता, सीईओ और सेक्रेटरी जनरल पीएचडीसीसीआई, श्री राजेश निगम, को- चेयर यूपी स्टेट चैप्टर, पीएचडीसीसीआई, डॉ. सूर्यकांत प्रोफेसर और हेड डिपार्टमेंट ऑफ रेस्पिरेट्री मेडिसिन, केजीएमयू, श्री प्रणव गुप्ता, डायरेक्टर जीबी सिस्टम इक्विपमेंट प्राइवेट लिमिटेड, श्री आशुतोष राय, डिप्टी डायरेक्टर, ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड, श्री जय कुमार गुप्ता, जनरल मैनेजर सिडबी, लखनऊ, डॉ दीपक कुमार अग्रवाल फाउंडर, मैनेजिंग डायरेक्टर एंड प्रेसिडेंट गैस्ट्रो केयर मेडिकल रिसर्च फाऊंडेशन ग्लोब हेल्थ केयर, श्री अतुल श्रीवास्तव, सीनियर रीजनल डायरेक्टर यूपी स्टेट चैप्टर पीएचडीसीसीआई शामिल रहे।

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कॉन्फ्रेंस में डॉ. सूर्य कांत ने कहा कि नीति आयोग के आकांक्षात्मक विकास खंड कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश में शानदार प्रदर्शन किया है। यह स्पष्ट  तौर पर देखने को मिल रहा है क्योंकि जिस समय मैं यहां एमबीबीएस करने आया था उस समय पर 8 मेडिकल कॉलेज थे। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में 80 मेडिकल कॉलेज हैं। मेडिकल एजुकेशन सेक्टर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना हेल्थकेयर के विकास की बुनियाद है। इसी तरह 2002 तक देश में सिर्फ एक एम्स हुआ करता था और वर्तमान समय में कुल 33 एम्स हैं। यूपी की अगर बात की जाए तो रायबरेली और गोरखपुर में एम्स हैं। इसके अलावा यूपी में 03 मेडिकल यूनिवर्सिटीज भी हैं। यह भी एक संयोग है कि 1905 जब  पीएचडीसीसीआई का गठन हुआ था उसी समय केजीएमयू का भी फाऊंडेशन स्टोन रखा गया था। इसके अलावा सभी बड़े कॉर्पोरेट अस्पताल उत्तर प्रदेश में हैं। इसका सबसे बड़ा प्रभाव इन्फेंट मोर्टलिटी रेट में देखने को मिला है। यह उत्तर प्रदेश में घटकर प्रति हजार में सिर्फ 38 बचा है। वहीं मैटरनल मोर्टलिटी एक लाख में सिर्फ 150 है। हेल्थकेयर सेक्टर में इनोवेशन सबसे बड़ा रोल निभाता है। वर्तमान समय में रोबोट हेल्थ केयर सेक्टर में नवाचार का पर्याय बन चुके हैं और हम यह गर्व के साथ कहना चाहते हैं कि हमारे सभी सरकारी अस्पताल रोबोट से परिपूर्ण हैं। 

डॉ रंजीत मेहता ने बताया कि जब भी हम सोशल और इकोनामिक वेलफेयर की बात करते हैं तो स्वास्थ्य सुविधाएं महत्वपूर्ण रोल अदा करती हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य को प्राप्त करने में हेल्थ सेक्टर का बहुत बड़ा योगदान रहेगा। एक स्वस्थ समाज ही अच्छी प्रोडक्टिविटी दे सकता है क्योंकि जब हमारे बच्चे, माताएं और समाज में सभी लोग स्वस्थ होंगे तो वही स्वस्थ लोग समाज में बेहतर योगदान दे सकते हैं। इसके साथ ही यहां का डिजिटल और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदेश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उत्तर प्रदेश को एक्सप्रेस वे प्रदेश के रूप में ख्याति प्राप्त है। यह प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर का सबसे बड़ा उदाहरण है, वहीं डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में यूपीआई की बात की जाए तो यह देश ही नहीं दुनिया भर में प्रसिद्ध है। 

सिडबी के जनरल मैनेजर श्री जय कुमार गुप्ता ने बताया कि सिडबी एमएसएमई को डायरेक्ट और इनडायरेक्ट फाइनेंसिंग के माध्यम से क्रेडिट प्रदान करता है। डायरेक्ट फाइनेंसिंग में सिडबी सीधे एमएसएमई को लोन देता है, जबकि इनडायरेक्ट में बैंक, एनबीएफसी और अन्य संस्थाओं को रिफाइनेंसिंग प्रदान करता है। हेल्थकेयर सेक्टर में, सिडबी फार्मास्यूटिकल्स जैसे विशिष्ट क्षेत्रों के लिए सरकारी योजनाओं का प्रबंधन करता है और सामान्य एमएसएमई स्कीम्स को लागू करता है जो अस्पतालों, मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग और स्वास्थ्य सेवाओं पर लागू होती हैं। ये स्कीम्स एमएसएमई को इक्विपमेंट खरीदने, वर्किंग कैपिटल मैनेज करने, टेक्नोलॉजी अपग्रेड करने और मुश्किल समय में सहायता प्रदान करने के लिए डिजाइन की गई हैं। विशेष रूप से कोविड-19 जैसे संकट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए विशेष स्कीम्स लॉन्च की गई थीं। वर्तमान समय पूरी दुनिया भारत की ओर सिर्फ एक अपॉर्चुनिटी नहीं बल्कि सॉल्यूशन प्रोवाइडर की तरह देख रहा है।

नाबार्ड के सहयोग से मिली ग्लोबल पहचान  यूपीआई टेक्स में जीआई टैग प्राप्त प्रोडक्ट्स की धूम है। इससे जुड़े विभिन्न छोटे कारोबारी बेहद प्रसन्न हैं। इन कारोबारियों के प्रोडक्ट्स निर्यात में नाबार्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वाराणसी निवासी शहनाई मेकर और वादक राकेश कुमार बताते हैं कि शहनाई बनाने और बजाने का काम हमारे दादा के समय से चला आ रहा है। मेरे गुरु उस्ताद बिस्मिल्लाह खां साहब आज गर्व से फूले नहीं समा रहे होंगे की जिस शहनाई का जादू उन्होंने दुनिया में बिखेरा उसे जीआई टैग से नवाजा गया है। वह बताते हैं कि यह टैग मिलने से न सिर्फ शहनाई वादकों का सम्मान बढ़ा है बल्कि कारोबार में भी इजाफा हुआ है। एक समय था जब कोरोना के समय यह धंधा लगभग समाप्त हो गया था लेकिन सरकार के प्रयासों से शहनाई को फिर से वही रुतबा और इज्जत मिली है। अब हमें देश के कोने-कोने से शहनाई के ऑर्डर भी मिलते हैं।

निजामाबाद में ब्लैक क्ले पॉटरी का लगभग 10 साल से काम करने वाले दीपक प्रजापति बताते हैं की ब्लैक पॉटरी कला को जीआई टैग मिलने से उनके व्यापार में लगभग 20% की बढ़ोतरी हुई है। इतना ही नहीं वह कहते हैं कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के उद्घाटन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को गणेश क्ले पॉटरी योगी जी द्वारा दी गई थी। इसके अलावा G7 समिट में जापान के प्रधानमंत्री को भी हमारे द्वारा निर्मित ब्लैक पॉटरी मटके को प्रधानमंत्री जी ने भेंट किया था। जीआई टैग मिलने से सबसे ज्यादा लाभ यह हुआ है कि लोग अब ऑथेंटिक ब्लैक क्ले पॉटरी मार्क्स को पहचान कर उन्हें आर्डर देते हैं। उन्होंने बताया कि हमारा सामान इंग्लैंड से लेकर चीन तक में एक्सपोर्ट होता है।

मुरादाबाद में पीतल के समान का काम करने वाले कारोबारी मोहम्मद आबिद ने बताया कि अभी तक बड़े कारोबारियों की इस धंधे में मनॉपली थी लेकिन अब मुरादाबाद में पीतल के बर्तनों को जीआई टैग मिलने के बाद नाबार्ड के सहयोग से हम जैसे छोटे व्यापारी भी अपना व्यापार कर पा रहे हैं।

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