बागी बलिया के प्रथम क्रांतिकारी मंगल पाण्डेय को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि; गड़वार में गूँजा आजादी का उद्घोष
शौर्य और वीरता का नमन
समारोह का शुभारंभ अमर शहीद मंगल पाण्डेय और भगवान परशुराम के तैल चित्र पर पुष्पार्पण, माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने 'बागी बलिया' के उस सपूत को याद किया जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी।
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वह 'चिंगारी'
मुख्य वक्ता और बीएसएस के प्रदेश महासचिव राजेश मिश्र ने मंगल पाण्डेय के ऐतिहासिक बलिदान पर प्रकाश डालते हुए कहा, "1857 में जब पूरी दुनिया में ब्रिटिश हुकूमत का डंका बजता था, तब बलिया के इस जांबाज सैनिक ने सबसे पहले बगावत का झंडा बुलंद किया था। 34वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री में तैनात मंगल पाण्डेय ने बैरकपुर छावनी में गाय और सूअर की चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग का विरोध कर अंग्रेजी हुकूमत को खुली चुनौती दी थी।"
उन्होंने आगे कहा कि 29 मार्च 1857 को जलाई गई वह चिंगारी आगे चलकर देश की आजादी का महासंग्राम बनी। बलिया की धरती पर ऐसे क्रांतिकारी का जन्म लेना हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।
कार्यक्रम का नेतृत्व
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा ने की, जबकि मंच का सफल संचालन राकेश तिवारी द्वारा किया गया। वक्ताओं ने युवाओं से मंगल पाण्डेय के आदर्शों और देशभक्ति की भावना को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
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स्थान: गांधी चबूतरा, ग्राम मसहां, गड़वार (बलिया)।
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अवसर: अमर शहीद मंगल पाण्डेय जयंती समारोह।
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इतिहास की झलक: बैरकपुर छावनी की बगावत और 1857 की क्रांति का जिक्र।
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प्रमुख संदेश: देश के प्रति निष्ठा और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना।

