हाई बीपी को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी, समय पर जांच और नियमित इलाज है जरूरी
Taking high blood pressure lightly can prove costly; timely check-ups and regular treatment are essential.
Lucknow। बदलती जीवनशैली, तनाव, गलत खानपान और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण हाई ब्लड प्रेशर यानी Hypertension की समस्या तेजी से बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनियाभर में 100 करोड़ से अधिक लोग हाई बीपी से पीड़ित हैं और हर साल लाखों लोगों की मौत इससे जुड़ी जटिलताओं के कारण होती है। यही वजह है कि इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है। वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे से पहले Medanta Hospital के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने लोगों से नियमित बीपी जांच कराने और इलाज को बीच में न छोड़ने की अपील की है।
शुरुआती लक्षण नहीं दिखते, इसलिए बढ़ता है खतरा
Dr. R. K. Saran, डायरेक्टर क्लिनिकल एंड प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी, ने बताया कि हाई बीपी के शुरुआती चरण में अक्सर कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। कई लोग यह मान लेते हैं कि जब उन्हें परेशानी नहीं हो रही तो उनका ब्लड प्रेशर सामान्य होगा, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है।
उन्होंने बताया कि सामान्य ब्लड प्रेशर लगभग 120/80 माना जाता है। हालांकि तनाव और दिनभर की गतिविधियों के कारण इसमें बदलाव हो सकता है। यदि लगातार बीपी हाई आ रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
दवा बीच में छोड़ना हो सकता है खतरनाक
Dr. P. K. Goyal, डायरेक्टर इंटरवेंशन कार्डियोलॉजी, ने कहा कि हाई बीपी का समय पर पता लगना बेहद जरूरी है। एक बार बीमारी की पुष्टि हो जाने के बाद नियमित इलाज और दवाओं का सेवन लगातार जारी रखना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कई मरीज बीपी सामान्य होने पर खुद ही दवाएं बंद कर देते हैं, जो गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। उम्र बढ़ने के साथ हाई बीपी का जोखिम भी बढ़ता है, इसलिए नियमित जांच बेहद आवश्यक है।
लाइफस्टाइल में बदलाव से किया जा सकता है बचाव
Dr. S. K. Dwivedi ने कहा कि हाई बीपी से बचने के लिए खानपान और जीवनशैली में सुधार जरूरी है। इसके लिए:
- नमक का सेवन कम करें
- तला-भुना और अधिक मसालेदार भोजन कम लें
- नियमित व्यायाम करें
- वजन नियंत्रित रखें
- तनाव से दूर रहने की कोशिश करें
- 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित बीपी जांच कराएं
उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय तक अनियंत्रित हाई बीपी रहने से Heart Attack, Stroke, किडनी फेल्योर और आंखों की रोशनी पर असर जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
