विक्रमादित्य बस्ती, अर्जुननगर में हिन्दू सम्मेलन एवं समरसता भोज सम्पन्न
सम्मेलन का उद्देश्य हिन्दू समाज की एकता को सुदृढ़ करना तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के प्रति जन-जागरूकता उत्पन्न करना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री विजय नारायण जी, अध्यक्ष श्री राम बहादुर जी, श्री सुनील गुप्ता जी, कवयित्री डॉ. मानसी जी (अयोध्या) एवं श्यामा जी ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लखनऊ विभाग के कुटुंब प्रबोधन संयोजक धीरज जी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की रक्षा तभी संभव है, जब हिन्दू समाज जागरूक, संगठित और सक्रिय रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिन्दुत्व किसी एक वर्ग या पंथ तक सीमित नहीं, बल्कि यह मानवता, सहिष्णुता और सद्भाव का जीवन दर्शन है।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि संघ ने समाज में स्वतंत्रता, समरसता और चेतना जागरण के लिए निरंतर कार्य किया है तथा अब ‘पंच-परिवर्तन’ के माध्यम से समाज को सकारात्मक दिशा देने हेतु प्रतिबद्ध है।

पंच-परिवर्तन के प्रमुख बिंदु
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सामाजिक समरसता – समाज के सभी वर्गों में सौहार्द और सद्भाव
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कुटुंब प्रबोधन – परिवार को राष्ट्र निर्माण की मूल इकाई के रूप में सुदृढ़ करना
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पर्यावरण संरक्षण – पृथ्वी को माता मानते हुए जीवनशैली में आवश्यक परिवर्तन
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स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता – स्वदेशी अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन
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नागरिक कर्तव्य – सामाजिक दायित्वों का निर्वहन एवं राष्ट्रहित में योगदान
मुख्य वक्ता ने विश्वास व्यक्त किया कि पंच-परिवर्तन के ये लक्ष्य भारतीय समाज की दिशा और दशा को नया आयाम प्रदान करेंगे।
कार्यक्रम की समस्त व्यवस्थाओं का दायित्व श्री अवधेश जी ने संभाला। कार्यक्रम का संचालन श्री रूद्र कुमार जी द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन श्री सुनील गुप्ता जी ने प्रस्तुत किया।
