उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति में ऐतिहासिक सुधार , पीक ऑवर में भी कटौती लगभग समाप्त, निवेश और रोजगार को मिला संबल

Historic improvement in power supply in Uttar Pradesh
Power cuts almost eliminated even during peak hours, boosting investment and employment.
 
उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति में ऐतिहासिक सुधार , पीक ऑवर में भी कटौती लगभग समाप्त, निवेश और रोजगार को मिला संबल

लखनऊ, 07 फरवरी।  उत्तर प्रदेश में बिजली संकट अब अतीत की बात बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक सुधार करते हुए बिजली की कमी से जूझने वाले राज्य की छवि को पीछे छोड़ दिया है। सुनियोजित नीतियों, बेहतर प्रबंधन और ढांचागत सुधारों के चलते प्रदेश में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर लगातार घटा है और अब यह लगभग शून्य के स्तर पर पहुंच गया है।

योगी सरकार का स्पष्ट मानना है कि मजबूत बिजली व्यवस्था ही मजबूत अर्थव्यवस्था की आधारशिला होती है। बेहतर और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति के परिणामस्वरूप प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिला है, एमएसएमई सेक्टर को मजबूती मिली है और रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं।

मांग–आपूर्ति अंतर में निरंतर कमी

आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022–23 में उत्तर प्रदेश की कुल बिजली आवश्यकता 1,44,251 मिलियन यूनिट थी। सरकार द्वारा किए गए नीतिगत और प्रबंधन सुधारों का असर आने वाले वर्षों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा। वित्त वर्ष 2023–24 में बिजली आपूर्ति बढ़कर 1,48,287 मिलियन यूनिट हो गई, जबकि 2024–25 में यह 1,64,786 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई।चालू वित्तीय वर्ष 2025–26 में दिसंबर 2025 तक की स्थिति में बिजली व्यवस्था में व्यापक सुधार दर्ज किया गया है। इस अवधि में प्रदेश में बिजली की कमी व्यावहारिक रूप से लगभग समाप्त हो चुकी है।

पीक ऑवर में भी निर्बाध आपूर्ति

योगी सरकार ने बिजली उत्पादन के साथ-साथ पारेषण और वितरण व्यवस्था को भी मजबूत किया है। राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से अधिशेष बिजली वाले राज्यों से समय पर बिजली उपलब्ध कराई गई। इसका परिणाम यह रहा कि सर्वाधिक मांग वाले समय यानी पीक ऑवर में भी प्रदेश में बिजली आपूर्ति लगभग पूरी बनी रही, जिससे उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली।

आरडीएसएस और स्मार्ट मीटरिंग से सुधार

संशोधित वितरण क्षेत्र सुधार योजना (आरडीएसएस) के तहत जर्जर बिजली लाइनों को बदला गया, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई और स्मार्ट मीटरिंग को व्यापक रूप से लागू किया गया। इससे वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की कार्यक्षमता में सुधार हुआ, घाटे में कमी आई और बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सका।

ग्रामीण क्षेत्रों को मिली नई ऊर्जा

ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचाने के लिए दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और सौभाग्य योजना के तहत बड़े पैमाने पर कार्य किए गए। गांवों और घरों तक बिजली पहुंचने से कृषि गतिविधियों, कुटीर उद्योगों और छोटे कारोबारों को नई गति मिली है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। समग्र रूप से, उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति में आया यह व्यापक सुधार न केवल प्रदेश की आर्थिक प्रगति को गति दे रहा है, बल्कि निवेश, एमएसएमई विकास और रोजगार सृजन के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

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