बरसाती फफूंद से कैसे बचें? घर को सीलन और बदबू से दूर रखने के आसान उपाय
(आर. सूर्यकुमारी-विभूति फीचर्स)
बरसात का मौसम अपने साथ ठंडक और हरियाली तो लाता है, लेकिन लगातार बढ़ी हुई नमी और सीलन घर के लिए परेशानी भी बन सकती है। यही नमी दीवारों, लकड़ी, कपड़ों, गद्दों और दूसरे सामान पर फफूंद (मोल्ड) के पनपने की वजह बनती है।
बरसात में अक्सर बिस्तर, कंबल और कपड़ों से बासी या सीलन जैसी गंध आने लगती है। दीवारों के कोनों में काले, हरे या सफेद धब्बे दिखाई दे सकते हैं और पेंट या प्लास्टर भी उखड़ने लग सकता है। फफूंद नम सतहों पर तेजी से बढ़ सकती है और घर के अंदर इसकी मौजूदगी कुछ लोगों में नाक बंद होना, खांसी, घरघराहट, आंखों में जलन या त्वचा पर खुजली जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है। अस्थमा या फफूंद से एलर्जी वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
ऐसे में बरसात के महीनों में घर को सूखा, हवादार और साफ रखने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं।
1. सबसे पहले दीवारों की सीलन का कारण खोजें
यदि छत, दीवार, खिड़की या पाइप से पानी रिस रहा है तो सबसे पहले उसे ठीक कराएं। केवल फफूंद वाले हिस्से को साफ कर देने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। जब तक नमी का स्रोत बना रहेगा, फफूंद दोबारा पनप सकती है।
दीवारों और फर्नीचर के पीछे के हिस्सों की नियमित सफाई करें। यदि किसी कठोर सतह पर फफूंद दिखाई दे तो उसे पानी और डिटर्जेंट से साफ करके अच्छी तरह सुखाएं।
2. घर में हवा का आवागमन बनाए रखें
बरसात में घर की खिड़कियां और दरवाजे हर समय बंद रखने से अंदर की नमी बढ़ सकती है। मौसम और सुरक्षा की स्थिति अनुकूल हो तो घर में ताजी हवा आने दें।
रसोई और बाथरूम में एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल करें। संभव हो तो घर की नमी को नियंत्रित करने के लिए एयर कंडीशनर या डिह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है। CDC घर के अंदर नमी को लगभग 50 प्रतिशत या उससे कम रखने की सलाह देता है।
3. कपड़ों और बिस्तर को नमी से बचाएं
बरसात में कपड़े देर से सूखते हैं। इसलिए कपड़े पूरी तरह सूखने के बाद ही उन्हें अलमारी में रखें। गीले या अधसूखे कपड़ों को लंबे समय तक बंद अलमारी में रखने से बदबू और फफूंद की समस्या बढ़ सकती है।
जब भी धूप निकले, चादर, कंबल, गद्दे और तकियों को कुछ समय के लिए धूप और खुली हवा दिखाएं। अलमारी को भी समय-समय पर खाली करके साफ और हवादार करें।
4. कपूर और नेफ्थलीन को फफूंद का इलाज न समझें
अलमारी में कपूर या नेफ्थलीन की गोलियां रखने की परंपरा आम है। इनसे गंध या कुछ कीटों की समस्या में मदद मिल सकती है, लेकिन इन्हें फफूंद खत्म करने का प्रमाणित उपाय नहीं माना जाना चाहिए।
फफूंद से वास्तविक बचाव के लिए नमी को नियंत्रित करना और प्रभावित सतह को साफ करना जरूरी है। नेफ्थलीन की गोलियों को बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें और पैकेट पर दिए सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
5. बदबू को परफ्यूम से ढकने के बजाय कारण दूर करें
रूम फ्रेशनर या परफ्यूम से कुछ समय के लिए सीलन की गंध कम महसूस हो सकती है, लेकिन इससे फफूंद खत्म नहीं होती। यदि घर में लगातार बदबू आ रही है तो दीवार, फर्श, अलमारी, गद्दे या किसी अन्य जगह पर नमी और फफूंद की जांच करें।
फफूंद दिखाई देने पर उसे साफ करना और नमी के स्रोत को खत्म करना ज्यादा जरूरी है।
6. फफूंद साफ करते समय रखें सावधानी
फफूंद साफ करते समय दस्ताने और आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनना बेहतर है। बड़े क्षेत्र में फफूंद फैली हो तो मास्क सहित उचित सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें।
सफाई के दौरान अलग-अलग केमिकल या क्लीनर को आपस में न मिलाएं। खासकर ब्लीच को अमोनिया या दूसरे क्लीनर के साथ मिलाना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे जहरीली गैस बन सकती है।
यदि घर में किसी व्यक्ति को अस्थमा, गंभीर एलर्जी या प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी समस्या है तो उसे फफूंद की सफाई से दूर रखना चाहिए।
7. गीली चीजों को जल्द सुखाएं
यदि बारिश या पानी भरने के कारण घर का कोई सामान गीला हो गया है तो उसे जल्द से जल्द सुखाने की कोशिश करें। CDC के अनुसार गीली जगहों और सामान को 24 से 48 घंटे के भीतर सुखाना फफूंद की वृद्धि रोकने में मदद कर सकता है।
जो सामान पूरी तरह साफ और सूख नहीं सकता, खासकर लंबे समय तक पानी में भीगा सामान, उसे हटाने की जरूरत पड़ सकती है।
बच्चों और बुजुर्गों का रखें खास ध्यान
घर में छोटे बच्चे, बुजुर्ग या अस्थमा और एलर्जी से परेशान लोग हों तो सीलन और फफूंद को नजरअंदाज न करें। फफूंद के संपर्क में आने से संवेदनशील लोगों में सांस संबंधी लक्षण बढ़ सकते हैं।
बरसात में घर को सिर्फ खुशबूदार रखना पर्याप्त नहीं है। सीलन की असली वजह दूर करना, नमी नियंत्रित रखना, हवा का आवागमन बनाए रखना और फफूंद को सुरक्षित तरीके से साफ करना ही बचाव का बेहतर तरीका है।
स्वच्छ और सूखा घर न केवल बरसात के मौसम को आरामदायक बनाता है, बल्कि परिवार के स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर वातावरण तैयार करता है।
