ICSI लखनऊ का बड़ा मंथन: बोर्डरूम की विधिक जटिलताओं और धारा 185 पर विशेषज्ञों ने किया आगाह
"गवर्नेंस ही कंपनियों की विश्वसनीयता का आधार" - सीएस पवन जी. चंडक
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और ICSI के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीएस पवन जी. चंडक ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी कंपनी की स्थिरता और बाजार में उसकी साख केवल मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस पर टिकी होती है।
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बेहतरीन करियर विकल्प: उन्होंने युवाओं को कंपनी सेक्रेटरी (CS) के पेशे से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि यह कम खर्च में एक उत्कृष्ट करियर अवसर है। यह पेशा युवाओं को सीधे निदेशक मंडल (Board of Directors) के स्तर पर कार्य करने का मौका देता है।
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यूपी में बढ़ता क्रेज: उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 4,845 CS सदस्य हैं, जबकि 20,411 छात्र इस कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। अकेले लखनऊ में ही 3,309 छात्र इस क्षेत्र में अपना भविष्य बना रहे हैं।
धारा 185 और कानूनी जोखिमों पर तकनीकी सत्र
सेमिना के तकनीकी सत्र में एसीसी लिमिटेड के पूर्व अनुपालन प्रमुख सीएस कालीदास रामास्वामी ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 185 के तहत निदेशकों को ऋण (Loans to Directors) देने से संबंधित प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने चेतावनी दी कि इन नियमों की अनदेखी करने पर कंपनियों को गंभीर कानूनी जोखिमों और जुर्मानों का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का जमावड़ा और सफल संचालन
कार्यक्रम की सफलता में नेतृत्व टीम का विशेष योगदान रहा, जिसमें पूर्व अध्यक्ष सीएस अभिषेक सिन्हा, सीएस शोभित रस्तोगी और पूर्व अध्यक्षा सीएस हिमांद्री वर्मा शामिल रहीं। कार्यक्रम में निम्नलिखित वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित रहे:
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सीएस धनंजय शुक्ला (पूर्व अध्यक्ष, ICSI)
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सीएस मनोज पूर्बे और सीएस सुरेश पांडेय (केंद्रीय परिषद सदस्य)
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सीएस मोहित चंद्र शर्मा (अध्यक्ष, लखनऊ चैप्टर)
आभार ज्ञापन
लखनऊ चैप्टर के अध्यक्ष सीएस मोहित चंद्र शर्मा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सेमिनार पेशेवरों को कानून और कॉरपोरेट जगत में हो रहे नवीनतम परिवर्तनों से अपडेट रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
