ईरान–अमेरिका तनाव: अगर खामेनेई हटे तो ईरान की कमान किसके हाथ?

 
If Khamenei Removed, Who Leads Iran? Rubio's Shocking Answer to Senate

आज  हम बात करने जा रहे हैं मिडिल ईस्ट के उस हॉट टॉपिक की, जिसने इस वक्त पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रखा है। जी हां दोस्तों, बात हो रही है ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की। हालात इतने गंभीर हैं कि अब सवाल सिर्फ जंग या शांति का नहीं रह गया, बल्कि ये भी पूछा जा रहा है — अगर ईरान में सत्ता का तख्तापलट हुआ, तो देश की कमान आखिर संभालेगा कौन?

इस पूरी बहस को और हवा दी है अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो के एक बयान ने। हाल ही में सीनेट फॉरेन रिलेशंस कमिटी के सामने उन्होंने जो कहा, उसने सबको चौंका दिया। जब उनसे पूछा गया कि अगर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सत्ता से हटते हैं, तो अगला नेता कौन होगा — तो रुबियो का जवाब था, “No one knows!” यानी, “कोई नहीं जानता।”

अब पहले ज़रा बैकग्राउंड समझते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। उनका साफ कहना है कि अगर ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर समझौता नहीं करता, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। इसी कड़ी में अमेरिका ने ईरान की ओर बड़े पैमाने पर नौसेना बल, यानी एक “मैसिव आर्मडा”, तैनात कर दिया है।

ईरान की तरफ से भी जवाब उतना ही कड़ा आया। तेहरान ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो उसकी सेनाएं तुरंत और पूरी ताकत से जवाब देंगी। यानी दोनों तरफ उंगलियां ट्रिगर पर हैं और माहौल बेहद तनावपूर्ण है।

इसी बीच, सीनेट की सुनवाई के दौरान मार्को रुबियो ने ईरान में रिजीम चेंज के सवाल पर खुलकर बात की। उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण दिया, जहां अमेरिका ने निकोलस मादुरो को हटाने की कोशिश की थी, लेकिन साथ ही ये भी कहा कि ईरान का मामला उससे कहीं ज्यादा जटिल है। रुबियो ने मजाकिया लहजे में कहा, “ये कोई फ्रोजन डिनर नहीं है, जिसे माइक्रोवेव में डालो और ढाई मिनट में तैयार!”

उनका कहना था कि भले ही ईरान की मौजूदा रिजीम आज तक की सबसे कमजोर स्थिति में दिख रही हो — अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है, लोग सड़कों पर हैं, और सरकार पर भ्रष्टाचार व आतंक को फंड देने के आरोप हैं — लेकिन फिर भी सत्ता ने अब तक विरोध प्रदर्शनों को दबाने में कामयाबी हासिल की है।

अब सबसे बड़ा सवाल — अगर 86 साल के अयातुल्ला खामेनेई, जो 1989 से सत्ता में हैं, किसी तरह हट जाते हैं, तो आगे क्या? रुबियो ने साफ कहा कि इसका कोई सीधा जवाब नहीं है। ईरान की सत्ता सिर्फ एक व्यक्ति के हाथ में नहीं है, बल्कि ये सुप्रीम लीडर, इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और कुछ क्वासी-इलेक्टेड नेताओं के जटिल नेटवर्क पर टिकी है। और इस सिस्टम में फिलहाल कोई क्लियर सक्सेसर नजर नहीं आता।

यही uncertainty अमेरिका के लिए भी सबसे बड़ी चिंता है। रुबियो ने कहा कि अगर हालात बिगड़े, तो अमेरिका अपने सैनिकों, सहयोगियों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए प्री-एम्प्टिव डिफेंस यानी पहले से एक्शन ले सकता है। हालांकि उन्होंने ये उम्मीद भी जताई कि हालात वहां तक न पहुंचें।

ज़रा गहराई से सोचिए — ईरान की राजनीतिक संरचना धर्म, सेना और सत्ता के मजबूत गठजोड़ पर आधारित है। कुछ समय पहले तक इब्राहिम राइसी को संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा था, लेकिन अब वो विकल्प भी अनिश्चित है। वहीं अमेरिका का दावा है कि आर्थिक संकट के बावजूद ईरान के पास अब भी हजारों लॉन्ग-रेंज मिसाइल्स हैं।

रुबियो ने ईरानी जनता की “कोर शिकायतों” का भी जिक्र किया — कि सरकार आम लोगों की भलाई के बजाय आतंकवादी संगठनों को फंड देने में ज्यादा पैसा खर्च कर रही है। यही वजह है कि देश अंदर से कमजोर दिखता है, लेकिन क्या ये कमजोरी रिजीम चेंज के लिए काफी है? एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यही अनिश्चितता अमेरिका को फुल-स्केल मिलिट्री एक्शन से रोक रही है।

दोस्तों, कुल मिलाकर ईरान-अमेरिका तनाव इस वक्त एक बारूद के ढेर पर खड़ा है। ट्रंप की सख्ती, रुबियो की ईमानदार स्वीकारोक्ति और ईरान की जवाबी ताकत — सब मिलकर मिडिल ईस्ट को बेहद नाज़ुक मोड़ पर ले आए हैं।

अब सवाल आपसे — क्या आपको लगता है कि ईरान में सच में रिजीम चेंज हो सकता है? या ये सिर्फ ताकत दिखाने का खेल है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।

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