हीमोग्लोबिन सामान्य हो, फिर भी गर्भवती की सांस फूले , तो दिल की जांच जरूरी

A normal hemoglobin level, yet a pregnant woman is short of breath—a heart checkup is necessary.
 
हीमोग्लोबिन सामान्य हो, फिर भी गर्भवती की सांस फूले , तो दिल की जांच जरूरी
लखनऊ। गर्भावस्था के दौरान यदि किसी महिला का हीमोग्लोबिन स्तर सामान्य है, लेकिन फिर भी सांस फूलने की शिकायत हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह दिल की बीमारी—विशेषकर हार्ट वॉल्व से जुड़ी समस्या—का संकेत हो सकता है। यह जानकारी लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग की डॉ. मोनिका भंडारी ने साझा की।

वह शनिवार को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के अटल बिहारी वाजपेई साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्डियोलॉजी सम्मेलन में बोल रही थीं। यह सम्मेलन कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में हुआ।

डॉ. मोनिका भंडारी ने बताया कि गर्भावस्था के चौथे महीने के बाद शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यदि पहले से हार्ट वॉल्व में सिकुड़न या लीक की समस्या हो, तो सांस फूलना, थकान और तेज धड़कन जैसे लक्षण उभर सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ या हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और उपचार से मां और शिशु—दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

लारी कॉर्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. ऋषि सेट्ठी ने कहा कि धूम्रपान, तली-भुनी व फास्ट फूड, लगातार मानसिक तनाव, लंबे समय तक बैठकर काम करना और व्यायाम की कमी—ये सभी दिल की सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। शुरुआती लक्षण जैसे हल्का सीने का दर्द, सांस फूलना या असामान्य थकान को नजरअंदाज करना जोखिम बढ़ाता है। नियमित जांच, संतुलित आहार और रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम से जोखिम घटाया जा सकता है।

वॉकाथन से दिल की सेहत का संदेश


डॉ. अक्षय प्रधान ने बताया कि जागरूकता के लिए सुबह वॉकाथन आयोजित की गई, जिसमें घंटाघर से केजीएमयू तक डॉक्टरों, कर्मचारियों और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया। उद्देश्य स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना था।

महिलाओं में बढ़ता हार्ट अटैक का खतरा


डॉ. प्रवेश विश्वकर्मा ने बताया कि बढ़ते कार्य-दबाव और तनाव के कारण महिलाओं में दिल की सेहत को प्रभावित करने वाले हार्मोनल बदलाव पहले की तुलना में जल्दी दिखने लगे हैं। जंक फूड, धूम्रपान और शराब के बढ़ते सेवन से महिलाओं में भी हार्ट अटैक का जोखिम तेजी से बढ़ा है।

समय पर जांच बेहद जरूरी


डॉ. अखिल शर्मा के अनुसार 20 वर्ष की उम्र के बाद लिपिड प्रोफाइल, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, हार्मोन स्क्रीनिंग, थायरॉयड और हीमोग्लोबिन की नियमित जांच करानी चाहिए। वार्षिक जांच से दिल की बीमारी की समय पर पहचान संभव है।

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