ऑनलाइन फ्रॉड से बचना है तो अपनाएं SBI Card की ये 10 सुरक्षित डिजिटल आदतें, जानें खुद को सेफ रखने का तरीका

To avoid online fraud, adopt these 10 safe digital habits from SBI Card; learn how to keep yourself safe.
 
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Cyber Security & Safe Digital Payment Tips: आज के आधुनिक दौर में हमारे शॉपिंग करने, पैसे खर्च करने और बिलों का भुगतान करने का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। ऑनलाइन शॉपिंग, ट्रैवल बुकिंग और रोज़मर्रा के लेन-देन के लिए डिजिटल माध्यमों और क्रेडिट कार्ड का उपयोग तेज़ी से बढ़ा है। लेकिन इस तकनीकी विस्तार ने साइबर अपराधियों और जालसाजों (Fraudsters) को भी ठगी के नए और आधुनिक तरीके ढूंढने के अवसर दे दिए हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि देश में रिपोर्ट होने वाले कुल वित्तीय फ्रॉड के मामलों में लगभग 74 प्रतिशत हिस्सेदारी केवल कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ी धोखाधड़ी की है। ऐसे में वित्तीय नुकसान और मानसिक तनाव से बचने के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

एसबीआई कार्ड की एमडी और सीईओ सलिला पांडे के अनुसार, डिजिटल पेमेंट का भविष्य पूरी तरह ग्राहकों के 'विश्वास' पर टिका है। वित्तीय संस्थाएं तो सुरक्षा ढांचे को मजबूत कर ही रही हैं, लेकिन जब तक ग्राहक खुद जागरूक नहीं होंगे, तब तक फ्रॉड को पूरी तरह रोकना मुमकिन नहीं है।

सुरक्षित डिजिटल लेन-देन के लिए SBI Card के 10 सुनहरे नियम

अपने पैसों और निजी जानकारियों को सुरक्षित रखने के लिए हर इंटरनेट और कार्ड यूजर को इन 10 बातों का सख्ती से पालन करना चाहिए:

 केवल प्रमाणित और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से ही करें शॉपिंग

हमेशा आधिकारिक ब्रांड वेबसाइटों या देश के जाने-माने ऑनलाइन मार्केटप्लेस से ही खरीदारी करें। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप या मैसेजिंग ऐप्स पर अज्ञात लोगों द्वारा भेजे गए लुभावने लिंक्स या नकली वेबसाइटों पर क्लिक करने की भूल बिल्कुल न करें।

 विश्वसनीय ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें मोबाइल एप्लीकेशन

अपने स्मार्टफोन में कोई भी ऐप हमेशा गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) या एप्पल ऐप स्टोर (Apple App Store) जैसे आधिकारिक माध्यमों से ही इंस्टॉल करें। किसी भी अनजान वेबसाइट, एसएमएस या क्यूआर कोड (QR Code) के जरिए मिलने वाली APK फाइलों को डाउनलोड न करें, इनमें ऐसे मैलवेयर हो सकते हैं जो आपके फोन का डेटा चोरी कर लें।

गोपनीय वित्तीय डेटा कभी किसी से शेयर न करें

यह बात गांठ बांध लें कि कोई भी वैध वित्तीय संस्था या बैंक कभी भी आपसे आपकी गोपनीय जानकारी नहीं मांगता। इसलिए किसी भी व्यक्ति के साथ अपने कार्ड का नंबर, सीवीवी (CVV), पिन (PIN) या ओटीपी (OTP) साझा न करें। सोशल मीडिया पर किसी शिकायत के दौरान भी कमेंट्स में अपनी निजी जानकारी न लिखें।

स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स से रहें कोसों दूर

कस्टमर केयर अधिकारी या किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने मोबाइल, लैपटॉप या डेस्कटॉप पर कोई भी स्क्रीन शेयरिंग ऐप (जैसे AnyDesk, TeamViewer आदि) डाउनलोड न करें और न ही स्क्रीन शेयर करें। ऐसा करने से जालसाज आपके फोन पर आने वाले ओटीपी और पासवर्ड को लाइव देख लेते हैं।

फिशिंग (फर्जी मैसेज और ई-मेल) को पहचानें

आजकल धोखेबाज ऐसे मैसेज भेजते हैं जिनमें दावा होता है कि आपका बैंक अकाउंट ब्लॉक हो गया है, आपके रिवॉर्ड पॉइंट्स एक्सपायर हो रहे हैं, या फर्जी कूरियर डिलीवरी और ई-चालान का डर दिखाया जाता है। ऐसे किसी भी मैसेज पर पैनिक होने के बजाय हमेशा आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर पर बात करके सच्चाई का पता लगाएं।

'बैंक अधिकारी' बनकर आने वाली कॉल्स की तुरंत जांच करें

जालसाज अक्सर बैंक कर्मचारी, क्रेडिट कार्ड प्रतिनिधि या इंश्योरेंस एजेंट बनकर कॉल करते हैं। वे कार्ड अपग्रेड करने, क्रेडिट लिमिट बढ़ाने या कैशबैक का लालच देकर आपको जल्दबाजी में फैसला लेने पर मजबूर करते हैं। ऐसी संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत फोन काट दें और खुद बैंक की शाखा या आधिकारिक हेल्पलाइन पर संपर्क करें।

अनधिकृत भुगतान पर तुरंत एक्शन लें और रिपोर्ट करें

यदि आपके खाते में कोई ऐसा रिफंड या अनजाना ट्रांजैक्शन दिखता है जिसकी आपको जानकारी नहीं है, तो तुरंत जांचें। अगर गलती से कभी आपकी कोई गोपनीय जानकारी लीक हो जाती है या खाते से पैसे कट जाते हैं, तो बिना एक मिनट गंवाए अपने कार्ड/खाते को ब्लॉक करवाएं और तुरंत साइबर क्राइम विभाग को इसकी सूचना दें।

. फेक ऑफर्स और रिवॉर्ड पॉइंट्स के झांसे में न आएं

महंगे गैजेट्स या सामानों पर मिलने वाले असामान्य रूप से बड़े डिस्काउंट या ऑफर्स को लेकर सतर्क रहें। रिवॉर्ड पॉइंट्स को रिडीम करने के लिए किसी भी लिंक पर क्लिक करने या अपनी कार्ड डिटेल्स दर्ज करने से पहले ऑफर की सत्यता की जांच संबंधित ब्रांड की ऑफिशियल साइट पर जाकर करें।

 ट्रांजैक्शन अलर्ट एक्टिव रखें और नियमित चेक करें अकाउंट

अपने क्रेडिट कार्ड और बैंक अकाउंट के लिए एसएमएस (SMS) और ई-मेल अलर्ट हमेशा चालू रखें, ताकि हर छोटे-बड़े लेन-देन की जानकारी आपको तुरंत मिले। इसके अलावा, हफ्ते में कम से कम एक बार अपने बैंक स्टेटमेंट या मोबाइल ऐप में जाकर ट्रांजैक्शन हिस्ट्री की जांच ज़रूर करें।

 हमेशा बनाएं 'स्ट्रॉन्ग' और यूनिक पासवर्ड

अपने नेट बैंकिंग, शॉपिंग ऐप्स और ई-मेल के लिए हमेशा मजबूत पासवर्ड (जिसमें नंबर्स, स्पेशल कैरेक्टर्स और लेटर्स का मेल हो) बनाएं। अपने पासवर्ड को समय-समय पर बदलते रहें और ध्यान रखें कि आपका सोशल मीडिया पासवर्ड और बैंकिंग पासवर्ड कभी एक जैसा न हो।डिजिटल युग में साइबर ठगी से बचने का सबसे प्रभावी हथियार कोई एंटीवायरस या तकनीक नहीं, बल्कि आपकी खुद की जागरूकता और सतर्कता है। जालसाज भले ही अपने तरीके बदल रहे हों, लेकिन यदि आप अपनी निजी जानकारियों को लेकर अलर्ट रहेंगे, तो आप पूरी तरह सुरक्षित रहकर डिजिटल बैंकिंग का लुत्फ उठा सकते हैं।

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