आईआईटी मद्रास और स्पार्क मिंडा फाउंडेशन के बीच ‘कदम’ प्रोस्थेटिक घुटने के लिए टेक्नोलॉजी लाइसेंस समझौता

Technology license agreement between IIT Madras and Spark Minda Foundation for the ‘Kadam’ prosthetic knee.
 
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लखनऊ। दिव्यांगजनों के लिए सुलभ और स्वदेशी सहायक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए आईआईटी मद्रास टेक्नोलॉजी ट्रांसफर ऑफिस (TTO) और स्पार्क मिंडा फाउंडेशन (SMF) ने ‘कदम’ प्रोस्थेटिक घुटने की तकनीक के हस्तांतरण के लिए गैर-अनन्य टेक्नोलॉजी लाइसेंस समझौता किया है।

आईआईटी मद्रास के अनुसार ‘कदम’ भारत में स्वदेशी रूप से विकसित चार-बार प्रोस्थेटिक घुटना है, जिसे विभिन्न प्रकार के भू-भाग पर बेहतर गतिशीलता में सहायता देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

इस समझौते के जरिए आईआईटी मद्रास की शोध एवं इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को स्पार्क मिंडा फाउंडेशन की उत्पाद विकास, विनिर्माण और सामाजिक पहुंच की क्षमताओं से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य तकनीक को प्रयोगशाला और शोध के स्तर से आगे ले जाकर अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना है।

स्वदेशी तकनीक को बड़े स्तर पर पहुंचाने पर जोर

स्पार्क मिंडा फाउंडेशन के अनुसार संस्था दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित करती है और जरूरतमंद लोगों को प्रोस्थेटिक एवं अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। फाउंडेशन की गतिविधियों में दिव्यांगजनों का सशक्तीकरण उसके प्रमुख सामाजिक सरोकारों में शामिल है।

साझेदारी के तहत ‘कदम’ प्रोस्थेटिक घुटने को बड़े पैमाने पर विकसित एवं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे अंग-विच्छेदन का सामना कर चुके लोगों के लिए स्वदेशी मोबिलिटी समाधान की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

तकनीक और सामाजिक जिम्मेदारी का संगम

कार्यक्रम में स्पार्क मिंडा ग्रुप के ग्रुप CTO एवं स्पार्क मिंडा टेक्निकल सेंटर के CEO डॉ. सुरेश डी. ने सामाजिक विकास से जुड़े समाधान तैयार करने में तकनीक और नवाचार की भूमिका पर जोर दिया।

स्पार्क मिंडा फाउंडेशन की चेयरपर्सन सारिका मिंडा ने कहा कि टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग समझौता केवल तकनीक के हस्तांतरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अकादमिक नवाचार, उद्योग की क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी को एक साथ लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

वहीं, आईआईटी मद्रास के नेशनल सेंटर फॉर असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजीज (NCAHT) तथा TTK सेंटर फॉर रिहैबिलिटेशन रिसर्च एंड डिवाइस डेवलपमेंट (R2D2) की प्रमुख और ‘कदम’ के विकास का नेतृत्व करने वाली प्रो. सुजाता श्रीनिवासन ने कहा कि दिव्यांगजनों को ऐसी उपयुक्त तकनीकों तक पहुंच मिलनी चाहिए, जो उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनने में मदद करें।

अकादमिक शोध से बड़े स्तर पर उपयोग तक

यह समझौता अकादमिक संस्थान और उद्योग के बीच सहयोग का उदाहरण है, जिसमें शोध एवं इंजीनियरिंग क्षमता को व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर उपयोग किए जा सकने वाले सहायक समाधान में बदलने का प्रयास किया गया है। IIT मद्रास का टेक्नोलॉजी ट्रांसफर तंत्र संस्थान में विकसित तकनीकों के लाइसेंसिंग, व्यावसायीकरण और उद्योग सहयोग के लिए काम करता है।

स्पार्क मिंडा फाउंडेशन भी दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए देश के विभिन्न राज्यों में कार्यक्रम संचालित करता है। फाउंडेशन के अनुसार उसके कार्यक्रमों का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों की जीवन गुणवत्ता बेहतर करना और अधिक समावेशी समाज के निर्माण में योगदान देना है।

इस साझेदारी से ‘कदम’ प्रोस्थेटिक घुटने की तकनीक को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने और भारत में स्वदेशी सहायक तकनीक के विकास को गति देने की उम्मीद है।

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