क्रांति के अमर पुरोधा: पंडित परमानन्द खरे, जिन्होंने 33 वर्ष जेल की कालकोठरी में बिताए
Immortal leader of the revolution: Pandit Parmanand Khare, who spent 33 years in prison.
Tue, 14 Apr 2026
भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में कुछ ऐसे महानायक हुए हैं जिनका त्याग और तपस्या शब्दों की सीमा से परे है। उन्हीं में से एक थे महर्षि पंडित परमानन्द खरे, जिन्होंने देश की वेदी पर अपनी जवानी और जीवन के अनमोल 33 वर्ष न्योछावर कर दिए। 13 अप्रैल को उनकी पुण्यतिथि पर कृतज्ञ राष्ट्र, उनके परिवारजनों और पूर्व सैनिकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रारंभिक जीवन और जन्म
क्रांतिवीर पंडित परमानन्द का जन्म 6 जून 1892 को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के राठ कस्बे के अंतर्गत सिकरौधा गाँव में हुआ था। उनके भीतर बचपन से ही राष्ट्रभक्ति की लौ प्रज्वलित थी, जो आगे चलकर धधकती ज्वाला बन गई।
सिंगापुर विद्रोह और क्रांतिकारी गतिविधियाँ
- पंडित परमानन्द केवल एक सेनानी नहीं, बल्कि एक ओजस्वी वक्ता भी थे। उनके शब्दों में इतना सामर्थ्य था कि वे सोई हुई आत्माओं को जगा देते थे।
- ऐतिहासिक भाषण: उन्होंने सिंगापुर में भारतीय सैनिकों के बीच ऐसा प्रभावशाली भाषण दिया कि ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिल गई।
- प्रभाव: उनके आह्वान से प्रेरित होकर भारतीय सैनिकों ने विद्रोह कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 600 अंग्रेज सैनिक मारे गए थे। इस घटना ने ब्रिटिश साम्राज्य को उनके नाम से खौफ खाने पर मजबूर कर दिया।
काला पानी की कठोर यातनाएँ
प्रथम लाहौर षड्यंत्र केस में गिरफ्तार होने के बाद उन्हें अंडमान-निकोबार की सेल्युलर जेल (काला पानी) भेजा गया।
उन्होंने अपने जीवन के 23 वर्ष काला पानी की उन कालकोठरियों में बिताए जहाँ सूरज की रोशनी भी मुश्किल से पहुँचती थी।
कुल मिलाकर उन्होंने 33 वर्ष जेल की सलाखों के पीछे रहकर अमानवीय यातनाएं सहीं, लेकिन कभी अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके।
सत्ता का मोह त्याग और सादगीपूर्ण जीवन
1947 में जब देश स्वतंत्र हुआ, तो कई लोग पदों की होड़ में थे, लेकिन पंडित परमानन्द जी ने एक मिसाल पेश की उन्होंने किसी भी प्रकार के सरकारी पद या राजनीतिक लाभ को स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
उन्होंने अपना शेष जीवन सादगी और निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में व्यतीत किया।
अंतिम विदाई
भारत माता का यह सच्चा सपूत 13 अप्रैल 1982 को पंचतत्व में विलीन हो गया। आज उनकी पुण्यतिथि पर राठ क्षेत्र के गौरव और देश के इस महान क्रांतिकारी को हमारा कोटि-कोटि नमन। "शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।"श्रद्धांजलि स्वरूप: परिवारजन, पूर्व सैनिक एवं समस्त राष्ट्रभक्त।
