संत समाज की एकजुटता और संत परंपरा के संरक्षण को लेकर हांसी में महत्वपूर्ण बैठक
बैठक में सतगुरु रविदास जी एवं दास पंथ से संबंधित डेरों की सुरक्षा, मूलभूत सुविधाओं और संत समाज के हितों को लेकर संगठित होकर कार्य करने पर विशेष जोर दिया गया। संतों ने कहा कि आपसी एकता और सहयोग के माध्यम से संत परंपरा, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों को मजबूती प्रदान की जा सकती है।
आचार्य सुनील दास जी के डेरा संत गुलाब दास पहुंचने पर संत विजेंद्र दास जी एवं संत दिव्यानंद जी ने उनका सम्मान किया। इस अवसर पर आचार्य सुनील दास जी ने कहा कि सतगुरु रविदास जी और उनके समकालीन संतों की महान वाणी को देश-प्रदेश के साथ-साथ विदेशों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। संतों के विचारों को केवल पढ़ने और सुनने तक सीमित न रखते हुए उन्हें जीवन में अपनाने का संदेश समाज तक पहुंचाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि संत रविदास जी की विचारधारा समानता, मानवता, भाईचारे और सम्मान का संदेश देती है। संत समाज के विभिन्न डेरों और संतों के सहयोग से इस महान विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए जाएंगे।
संत दिव्यानंद जी ने कहा कि संतों की शिक्षाएं केवल सुनने या पढ़ने के लिए नहीं हैं, बल्कि उन्हें जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धा है। संतों ने समाज को प्रेम, समानता, भाईचारे और मानवता का मार्ग दिखाया है। उन्होंने युवा पीढ़ी को संतों की वाणी और विचारधारा से जोड़ने पर विशेष बल दिया।
संत विजेंद्र दास जी ने संत गुलाब दास जी के जीवन और संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि करीब 250 वर्ष पूर्व संत गुलाब दास जी ने समानता और मानव सम्मान का संदेश दिया था। उन्होंने माता-बहनों के सम्मान को लेकर तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था के समक्ष भी अपनी बात मजबूती से रखी और अपने सिद्धांतों के लिए संघर्ष किया। उनका जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक है।
बैठक में संत फूल दास जी, संत कृष्ण कबीर डेरा ख्रेंटी जींद एवं मिशन उपाध्यक्ष सतीश जानी, अमित मेहरा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। बैठक के अंत में संत समाज की एकता को मजबूत करने, डेरों की सुरक्षा एवं मूलभूत सुविधाओं के लिए मिलकर प्रयास करने तथा संतों की वाणी और विचारों को देश-दुनिया तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
