प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से महत्वपूर्ण भेंट — संगठन, सनातन संस्कृति और राष्ट्र निर्माण पर विशेष चर्चा

राष्ट्रीय युवा वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हिंदू देव प्रकाश शुक्ला जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से की महत्वपूर्ण मुलाकात
 
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय युवा वाहिनी एवं राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हिंदू देव प्रकाश शुक्ला जी ने नई दिल्ली में भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी से महत्वपूर्ण एवं आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर संगठन के विस्तार, राष्ट्रसेवा, सनातन संस्कृति के संरक्षण तथा भारतीय वैदिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

इस अवसर पर तेलंगाना के राज्यपाल एवं हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माननीय श्री शिव प्रताप शुक्ला जी की गरिमामयी उपस्थिति भी रही। वरिष्ठ नेतृत्व की मौजूदगी में हुई इस मुलाकात को संगठन के लिए महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी अवसर माना जा रहा है।
भेंट के दौरान सनातन संस्कृति, भारतीय संस्कारों, गुरुकुल परंपरा और गौसेवा को सुदृढ़ करने के साथ नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने पर विशेष विचार-विमर्श हुआ। साथ ही भारत की प्राचीन वैदिक ज्ञान परंपरा को आधुनिक भारत की विकास यात्रा से जोड़ते हुए राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को लेकर भी चर्चा हुई।
हिंदू देव प्रकाश शुक्ला जी ने कहा कि उनका संकल्प भारत की सनातन संस्कृति, वैदिक ज्ञान, गौसेवा, गुरुकुल शिक्षा और भारतीय संस्कारों को मजबूत करते हुए ऐसे सशक्त, संस्कारित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देना है, जिसकी जड़ें अपनी गौरवशाली सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत से मजबूती से जुड़ी हों।
राष्ट्रीय युवा वाहिनी का मानना है कि देश की युवा शक्ति को केवल सामाजिक अथवा राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित न रहकर वर्षभर जनसेवा, राष्ट्रसेवा, गौसेवा, संस्कार निर्माण और समाजहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से हुई यह भेंट संगठन के कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायी अवसर है। संगठन का मानना है कि यह मुलाकात राष्ट्रहित में कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा, दिशा और सकारात्मक संकल्प प्रदान करेगी।


विशेष संकल्प

  1. सनातन संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन।
  2. भारतीय वैदिक ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना।
  3. गुरुकुल आधारित शिक्षा एवं भारतीय संस्कारों को प्रोत्साहन।
  4. गौशालाओं और गौसेवा को सुदृढ़ करना।
  5. युवा शक्ति को राष्ट्रसेवा और जनसेवा से जोड़ना।
  6. संस्कारित, सशक्त और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण।
  7. भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक एवं वैदिक विरासत के अनुरूप राष्ट्र की प्रगति में योगदान देना।

यह भेंट केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा, संगठन निर्माण, युवा शक्ति के सशक्तिकरण और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के संकल्प को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर रही।

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