इमरान मसूद का AAP को दो टूक संदेश, बोले- ‘कोई बीच का रास्ता नहीं’

INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन में AAP की गैरमौजूदगी पर कांग्रेस सांसद ने जताई नाराजगी, कहा- ‘या तो हमारे साथ आओ या बीजेपी के साथ जाओ’
 
इमरान मसूद का AAP को दो टूक संदेश, बोले- ‘कोई बीच का रास्ता नहीं’

नई दिल्ली। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR (Special Intensive Revision) को लेकर विपक्ष के आंदोलन के बीच कांग्रेस सांसद और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने आम आदमी पार्टी (AAP) को दो टूक संदेश दिया है। INDIA ब्लॉक के चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में AAP, DMK और BJD की गैरमौजूदगी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की लड़ाई में कोई बीच का रास्ता नहीं हो सकता।

इमरान मसूद ने कहा कि जो लोग राहुल गांधी के साथ हैं, उन्हें इस आंदोलन में भी साथ आना चाहिए। उन्होंने AAP की ओर से 10 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ अलग प्रदर्शन किए जाने के ऐलान के संदर्भ में कहा, “या तो हमारे साथ आओ या बीजेपी के साथ जाओ।”

विपक्षी एकजुटता पर उठे सवाल

मसूद का यह बयान चुनाव आयोग के मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच रणनीति को लेकर सामने आ रहे मतभेदों की ओर भी इशारा करता है। जहां कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के कई दल SIR तथा मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर संयुक्त प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं कुछ दलों ने अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है।इमरान मसूद ने विपक्षी एकजुटता की जरूरत पर जोर देते हुए संकेत दिया कि चुनावी व्यवस्था से जुड़े मुद्दे को लेकर सभी विपक्षी दलों को एक साझा मंच पर आना चाहिए।

CEC के इस्तीफे की मांग दोहराई

कांग्रेस सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और Form-6 से जुड़े विवाद को गंभीर मुद्दा बताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।हालांकि, इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग और बीजेपी का अपना पक्ष है। ऐसे में SIR, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के दावों पर बहस लगातार तेज होती जा रही है।

बढ़ रहा है INDIA ब्लॉक के भीतर दबाव

चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन को लेकर विपक्षी दलों की रणनीति में सामने आ रहे अंतर ने INDIA ब्लॉक की एकजुटता पर भी सवाल खड़े किए हैं। इमरान मसूद के बयान से साफ है कि कांग्रेस चाहती है कि चुनावी मुद्दों पर विपक्ष एकजुट होकर सरकार और चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखे। अब नजर इस बात पर होगी कि 10 अक्टूबर के AAP के प्रस्तावित प्रदर्शन और कांग्रेस के आंदोलन के बीच विपक्षी दलों के रिश्तों और साझा रणनीति पर इसका क्या असर पड़ता है।

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