युवाओं में बढ़ रहा न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा, समय पर जांच और इलाज जरूरी: मेदांता न्यूरो कॉन्क्लेव 2026 में विशेषज्ञ
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) स्टडी के अनुसार, न्यूरोलॉजिकल बीमारियां दुनियाभर में खराब स्वास्थ्य और विकलांगता के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इन बीमारियों का असर करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। भारत में हर साल करीब 18 से 20 लाख नए स्ट्रोक के मामले सामने आने का अनुमान है। विशेषज्ञों ने कहा कि 25 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में भी जीवनकाल के दौरान स्ट्रोक का जोखिम महत्वपूर्ण स्तर पर बना हुआ है।

उत्तर प्रदेश में भी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का बढ़ता बोझ चिंता का विषय है। विशेषज्ञों के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, तंबाकू का सेवन, अस्वस्थ जीवनशैली और विशेषज्ञ चिकित्सा तक देर से पहुंचना स्ट्रोक सहित कई बीमारियों के जोखिम को बढ़ाते हैं। स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में करीब हर चार में से एक वयस्क हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित है। विशेषज्ञों ने कहा कि स्ट्रोक के एक बड़े हिस्से को जीवनशैली में सुधार, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार के जरिए रोका जा सकता है।
इन्हीं चुनौतियों पर चर्चा के लिए मेदांता लखनऊ की ओर से मेदांता न्यूरो कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव में देशभर के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन और न्यूरो क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने स्ट्रोक के आधुनिक उपचार, मिर्गी, मूवमेंट डिसऑर्डर, न्यूरो-ऑन्कोलॉजी, कम चीरे वाली मस्तिष्क एवं रीढ़ की सर्जरी, न्यूरो इमेजिंग और मरीजों की रिकवरी से जुड़े उपचार में हुई नई प्रगति पर विचार-विमर्श किया।
कॉन्क्लेव का नेतृत्व डॉ. अनूप कुमार ठक्कर, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी; डॉ. रतीश जुयाल, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी; डॉ. रवि शंकर, डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी; डॉ. कमलेश सिंह भैसोरा, डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी; और डॉ. रोहित अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी ने किया। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे विशेषज्ञों ने जटिल न्यूरोलॉजिकल मामलों, आधुनिक इमेजिंग, स्ट्रोक प्रबंधन, मिर्गी, मूवमेंट डिसऑर्डर और न्यूनतम चीरे वाली सर्जरी तकनीकों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
वैज्ञानिक कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, पैनल चर्चाएं और जटिल मरीजों के मामलों पर केस डिस्कशन आयोजित किए गए। इन सत्रों के माध्यम से डॉक्टरों को न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में विकसित हो रही नई तकनीकों, उपचार पद्धतियों और बेहतर क्लिनिकल प्रैक्टिस पर विचार साझा करने का अवसर मिला।

मेदांता लखनऊ के मेडिकल डायरेक्टर एवं डायरेक्टर, यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी, डॉ. राकेश कपूर ने कहा कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियां अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर रही हैं और आने वाले वर्षों में इनका बोझ और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि न्यूरो कॉन्क्लेव का उद्देश्य देशभर के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर जटिल मरीजों के मामलों पर चर्चा करना और न्यूरोसाइंस में हुई नई प्रगति को मरीजों तक पहुंचाने की दिशा में बेहतर समन्वय विकसित करना है। उनके अनुसार समय पर बीमारी की पहचान, विशेषज्ञ चिकित्सा और उपचार में देरी से बचना बेहतर परिणामों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
वैज्ञानिक सत्रों के दौरान स्ट्रोक के आधुनिक उपचार, कम चीरे वाली ब्रेन और स्पाइन सर्जरी, मिर्गी प्रबंधन, गंभीर न्यूरोलॉजिकल मरीजों की देखभाल, न्यूरो इमेजिंग, मस्तिष्क की कार्यप्रणाली से जुड़ी सर्जरी और मरीजों की रिकवरी से जुड़े उपचार पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के बेहतर प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपचार और विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं के बीच मजबूत तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया।
कॉन्क्लेव में स्ट्रोक मरीजों के लिए इमरजेंसी चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने, आधुनिक इमेजिंग तकनीकों के जरिए बीमारी की जल्द पहचान करने और न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, न्यूरो क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट तथा पुनर्वास विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों के अनुसार मरीज को सही समय पर एकीकृत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना स्ट्रोक और अन्य गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में उपचार के परिणाम बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञों ने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने, तंबाकू से दूरी बनाने और नियमित शारीरिक गतिविधि को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने चेताया कि शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने अथवा समझने में परेशानी, अचानक तेज सिरदर्द, संतुलन बिगड़ना या बेहोशी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञों ने कहा कि स्ट्रोक या किसी अन्य गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को जल्द से जल्द विशेषज्ञ चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। समय पर पहचान, त्वरित उपचार और जनजागरूकता के जरिए उत्तर प्रदेश में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के प्रभाव को कम करने तथा मरीजों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।
