Jeet Adani बोले , भारत को AI का उपभोक्ता नहीं, मालिक बनना होगा

2035 तक 8.3 लाख करोड़ रुपये निवेश की घोषणा
 
Jeet Adani बोले , भारत को AI का उपभोक्ता नहीं, मालिक बनना होगा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सदी में भारत को केवल तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं, बल्कि उसे बनाने और नियंत्रित करने वाला राष्ट्र बनना होगा। यह बात Adani Group के डायरेक्टर Jeet Adani ने इंडिया AI समिट 2026 में कही। उन्होंने स्पष्ट कहा कि AI अब केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता, आर्थिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव का नया आधार बन रहा है।

उन्होंने समूह के चेयरमैन Gautam Adani द्वारा हाल ही में घोषित 8.3 लाख करोड़ रुपये के निवेश का उल्लेख करते हुए बताया कि यह निवेश भारत में ग्रीन एनर्जी आधारित AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए किया जाएगा। उनके अनुसार, यह कदम भारत को AI क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में परिवर्तनकारी साबित होगा।

AI: नई सदी की निर्णायक तकनीक

जीत अदाणी ने कहा कि इतिहास के हर युग को एक तकनीक ने परिभाषित किया है—बिजली ने उद्योगों को गति दी, तेल ने वैश्विक राजनीति की दिशा बदली और इंटरनेट ने अर्थव्यवस्था को पुनर्परिभाषित किया। अब वही भूमिका AI निभाने जा रहा है। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि भारत AI अपनाएगा या नहीं, बल्कि यह है कि भारत अपनी बुद्धिमत्ता स्वयं विकसित करेगा या अन्य देशों की प्रणालियों पर निर्भर रहेगा।

भारत की AI शक्ति के तीन स्तंभ

उन्होंने भारत की AI रणनीति के तीन प्रमुख स्तंभ बताए—

  1. सम्पूर्ण ऊर्जा (Energy Sovereignty):
    AI सिस्टम भारी मात्रा में बिजली का उपयोग करते हैं। यदि ऊर्जा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी तो AI क्षमता भी सीमित रहेगी। सोलर और विंड एनर्जी का विस्तार अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा है। भविष्य में ग्रीन एनर्जी और AI डेटा सेंटर एकीकृत मॉडल में विकसित किए जाएंगे।

  2. क्लाउड पर संप्रभुता (Cloud Sovereignty):
    डिजिटल युग में डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितनी पहले सेना और नौसेना। यदि भारत का डेटा विदेशों में रहेगा तो रणनीतिक शक्ति भी बाहरी नियंत्रण में रहेगी। इसलिए देश में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना आवश्यक है।

  3. सेवा क्षेत्र में संप्रभुता (Service Sovereignty):
    IT क्रांति के दौरान भारत ने वैश्विक सेवाएं दीं, लेकिन आर्थिक लाभ का बड़ा हिस्सा विदेशों को गया। AI भारत को यह स्थिति बदलने का अवसर दे रहा है। भारत का AI किसानों, शिक्षा, स्वास्थ्य, लॉजिस्टिक्स और छोटे शहरों व गांवों के विकास के लिए प्राथमिकता से काम करे—यही लक्ष्य होना चाहिए।

आधुनिक राष्ट्रवाद और जिम्मेदारी

जीत अदाणी ने भावनात्मक अंदाज में कहा कि उनकी पीढ़ी को आजादी विरासत में मिली है, लेकिन उसे मजबूत और सुरक्षित करना उनकी जिम्मेदारी है। आधुनिक राष्ट्रवाद केवल विचार नहीं, बल्कि क्षमता, मजबूती और क्रियान्वयन का नाम है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाली AI सदी भारत की पहचान के साथ जुड़ी होगी। भारत केवल इस बदलाव का सहभागी नहीं बनेगा, बल्कि उसका नेतृत्व करेगा—नियंत्रण के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता और मानवता के हित में तकनीक विकसित करने के उद्देश्य से।

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