भारत बनेगा ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब: ECMS स्कीम से ₹4.5 लाख करोड़ के उत्पादन और 91,000 नौकरियों का लक्ष्य; अशोक चांडक ने बताया 'गेम-चेंजर'
लखनऊ | 31 मार्च 2026
भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव की लहर चल रही है। इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) के प्रेसिडेंट अशोक चांडक ने बताया कि केंद्र सरकार की ECMS स्कीम की सफलता यह दर्शाती है कि भारत अब केवल इरादों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर निर्णायक अमल कर रहा है।
निवेश और उत्पादन के चौंकाने वाले आँकड़े
अशोक चांडक के अनुसार, ECMS प्रोग्राम ने उद्योग जगत में जबरदस्त भरोसा पैदा किया है। इसके मुख्य आकर्षण निम्नलिखित हैं:
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निवेश: ₹59,350 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले अब तक ₹61,671 करोड़ की मंजूरियां मिल चुकी हैं।
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उत्पादन: इस स्कीम से ₹4,51,858 करोड़ से ज्यादा के उत्पादन की उम्मीद है, जो ₹4,56,500 करोड़ के सकल लक्ष्य के बेहद करीब है।
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रोजगार: अनुमानित 91,600 नौकरियों के मुकाबले अब तक 65,000 से ज्यादा नौकरियां सृजित की जा चुकी हैं।
विविधता और क्षेत्रीय विस्तार
यह स्कीम केवल कुछ उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार पूरे देश में है:
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उत्पाद श्रेणियां: लिथियम-आयन सेल, फ्लेक्सिबल पीसीबी, कनेक्टर और डिस्प्ले मॉड्यूल जैसे 16 प्रोडक्ट सेगमेंट में मंजूरियां दी गई हैं।
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राज्यों की भागीदारी: निवेश के मामले में 8 राज्य प्रमुखता से उभरे हैं, जिनमें कर्नाटक और महाराष्ट्र सबसे आगे हैं। कुल मिलाकर 12 राज्यों से 23 उत्पाद श्रेणियों में 75 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
डिज़ाइन और गुणवत्ता पर विशेष जोर
अशोक चांडक ने डिज़ाइन सामर्थ्य (Design Competency) और गुणवत्ता उत्कृष्टता (Quality Excellence) को भारत के विज़न का आधार बताया।
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सिक्स सिग्मा क्वालिटी: उन्होंने माननीय मंत्री के मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए 'सिक्स सिग्मा' गुणवत्ता और डिज़ाइन-आधारित मैन्युफैक्चरिंग अनिवार्य है।
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डिमांड और सप्लाई: आईईएसए प्रेसिडेंट ने जोर दिया कि जितनी जरूरी सप्लाई क्रिएशन है, उतनी ही जरूरी डिमांड क्रिएशन भी है। ओईएम (OEM) कंपनियों को 'मेड-इन-इंडिया' कंपोनेंट्स को सक्रियता से अपनाना चाहिए।
भविष्य की राह: स्केलिंग अप और लोकल सोर्सिंग
IESA ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के 'फास्ट-ट्रैक' अप्रोच की सराहना की है, जिससे 2026 तक भारत एक भरोसेमंद वैश्विक ESDM (इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग) डेस्टिनेशन बन गया है।
अगले चरण के मुख्य लक्ष्य:
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विश्व स्तरीय गुणवत्ता का निर्माण।
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मजबूत स्वदेशी डिज़ाइन टीमों का गठन।
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लोकल सोर्सिंग को बढ़ावा देना।
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भारतीय प्रोडक्ट्स का ग्लोबल 'बिल ऑफ मटेरियल्स' (BOM) में एकीकरण।
अशोक चांडक का मानना है कि ECMS केवल एक स्कीम नहीं, बल्कि एक गेम-चेंजर है, जो सेमीकंडक्टर के साथ-साथ कंपोनेंट और मटेरियल इकोसिस्टम को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। भारत अब दुनिया के लिए एक निवेश योग्य और स्थिर इलेक्ट्रॉनिक्स गंतव्य बन चुका है।
