भारत का रूस-यूक्रेन युद्ध पर रुख: UN में क्या कहा, क्यों बना है Neutral, और क्या होगा इसका ग्लोबल असर?

 
India’s Bold UN Statement on Russia-Ukraine War: 'A Looming Global Crisis

आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे मुद्दे की, जो पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध अब ढाई साल से ज्यादा समय से जारी है, और इसका असर न सिर्फ इन दोनों देशों पर, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत ने इस युद्ध को लेकर एक अहम बयान दिया, जिसमें कहा गया कि ये युद्ध 'निर्दोष लोगों की जान' ले रहा है और दुनिया पर एक और बड़ा संकट मंडरा रहा है। तो आखिर भारत ने UN में क्या कहा? क्यों भारत इस युद्ध में neutral stance अपनाए हुए है? और इसका global impact क्या है? इस वीडियो में हम जानेंगे इन सारे सवालों के जवाब तो वीडियो को लास्ट तक जरूर देखिएगा 

 रूस-यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था, और तब से ये युद्ध न सिर्फ यूरोप, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा संकट बन गया है। इस युद्ध में हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लाखों लोग बेघर हुए हैं, और global economy पर इसका गहरा असर पड़ा है। खाद्य संकट, ऊर्जा संकट, और महंगाई ने ग्लोबल साउथ के देशों को सबसे ज्यादा influence  किया है। भारत, जो ग्लोबल साउथ का एक प्रमुख देश है, ने इस युद्ध को लेकर हमेशा शांति और कूटनीति की वकालत की है। लेकिन हाल ही में UN में भारत के बयान ने सबका ध्यान खींचा है। भारत ने UN में कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण 'निर्दोष लोगों की जान' जा रही है, और ये युद्ध दुनिया के लिए एक और बड़ा संकट बन रहा है। भारत ने इस युद्ध को खत्म करने के लिए तत्काल शांति वार्ता और कूटनीतिक समाधान की मांग की है। लेकिन सवाल ये है कि भारत का रुख इतना neutral क्यों है? आइए, इसे समझते हैं।

 30 अगस्त 2025 को UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर एक मजबूत बयान दिया। उन्होंने कहा, "रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध न सिर्फ निर्दोष लोगों की जान ले रहा है, बल्कि ये वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। बढ़ती मौतों की संख्या हाल के कूटनीतिक प्रयासों के विपरीत है, और इसे तुरंत रोकने की जरूरत है।"भारत ने UN में साफ किया कि वो दोनों पक्षों से बातचीत और कूटनीति के जरिए इस युद्ध को खत्म करने की अपील करता है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 21 फरवरी 2025 को कहा था, "हमारा रुख स्पष्ट है। हम चाहते हैं कि दोनों पक्ष बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाएं और इस युद्ध को खत्म करें।"

भारत ने UN में बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि युद्ध का कोई विजेता नहीं होता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 2022 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा था, "यह युद्ध का युग नहीं है।" इसके बाद, उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ भी बातचीत की और शांति के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत की तटस्थता को लेकर कई लोग सवाल उठाते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि भारत को रूस की निंदा करनी चाहिए, जैसे पश्चिमी देशों ने की। लेकिन भारत का रुख उसकी strategic autonomy पर आधारित है। आइए, इसके पीछे के कारणों को समझते हैं:रूस के साथ ऐतिहासिक संबंध: भारत और रूस के बीच दशकों पुराना रिश्ता है। 1971 के भारत-पाक युद्ध में रूस ने भारत का साथ दिया था। रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर रहा है, और आज भी भारत की 60-70% सैन्य जरूरतें रूस से पूरी होती हैं।

चीन के खिलाफ संतुलन: भारत, चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए रूस पर निर्भर है। रूस-चीन की नजदीकियां भारत के लिए चिंता का विषय हैं, और इसलिए भारत रूस के साथ अपने रिश्ते बरकरार रखना चाहता है।

हालांकि, भारत ने यूक्रेन को मानवीय मदद भी दी है, जैसे दवाइयां और अन्य जरूरी सामान। भारत ने यूक्रेन में फंसे 20,000 से ज्यादा भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकालने के लिए रूस और यूक्रेन दोनों के साथ सहयोग किया।

भारत ने न सिर्फ शांति की अपील की है, बल्कि मध्यस्थता की भूमिका निभाने की भी कोशिश की है। 2024 में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस और यूक्रेन दोनों का दौरा किया। जुलाई 2024 में वो मास्को गए, जहां उन्होंने पुतिन से मुलाकात की। अगस्त 2024 में वो कीव गए और जेलेंस्की से बात की। इन मुलाकातों में उन्होंने शांति और बातचीत पर जोर दिया।

मोदी ने जेलेंस्की से कहा, "भारत यूक्रेन में शांति के लिए हरसंभव प्रयास करने को तैयार है। मैं व्यक्तिगत रूप से भी इसमें योगदान देना चाहता हूं।" वहीं, पुतिन के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत युद्ध के जल्द समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।

अमेरिका ने भी भारत की इस भूमिका की तारीफ की। राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा, "मैंने मोदी से उनकी यूक्रेन यात्रा पर बात की और उनकी शांति की अपील और मानवीय मदद की सराहना की।"

लेकिन  भारत की इस neutral को लेकर पश्चिमी देशों में कुछ नाराजगी भी है। अमेरिका और यूरोप चाहते हैं कि भारत रूस की खुलकर निंदा करे। लेकिन भारत का मानना है कि रूस को अलग-थलग करने से युद्ध और लंबा खिंच सकता है।

 रूस-यूक्रेन युद्ध का असर सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं है। इसने वैश्विक खाद्य और ऊर्जा संकट को बढ़ाया है। भारत जैसे देश, जो तेल और अनाज के आयात पर निर्भर हैं, इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। UN में भारत ने कहा कि युद्ध के कारण ग्लोबल साउथ के देशों को भारी नुकसान हो रहा है।

भारत के सामने एक और चुनौती है रूस-चीन की बढ़ती नजदीकियां। अगर रूस, चीन पर ज्यादा निर्भर हो जाता है, तो ये भारत के लिए रणनीतिक रूप से नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए भारत रूस के साथ अपने संबंधों को बनाए रखना चाहता है।

 भारत का UN में दिया गया बयान एक बार फिर दिखाता है कि भारत global platform पर एक जिम्मेदार और neutral role निभाने की कोशिश कर रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत का रुख साफ है - युद्ध का कोई फायदा नहीं, और इसे बातचीत से ही खत्म किया जा सकता है। लेकिन सवाल ये है कि क्या भारत वाकई इस युद्ध को खत्म करने में मध्यस्थता कर पाएगा? क्या दुनिया भारत की इस भूमिका को स्वीकार करेगी ? आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या भारत को रूस की निंदा करनी चाहिए,  कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर बताएं। 

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