सेंट जोसेफ के 39वें वार्षिकोत्सव 'अभिव्यक्ति-2025' में दिखी भारत की सांस्कृतिक छटा

St. Joseph's 39th Anniversary Celebration 'Abhivyakti-2025' showcases India's cultural heritage
 
St. Joseph's 39th Anniversary Celebration 'Abhivyakti-2025' showcases India's cultural heritage
लखनऊ। सेंट जोसेफ विद्यालय, राजाजीपुरम् शाखा का 39वां वार्षिकोत्सव समारोह 'अभिव्यक्ति-2025: समन्वय-संस्कृतियों का' विशाल प्रांगण में बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस दो दिवसीय आयोजन में प्री-प्राइमरी और प्राइमरी के छोटे-छोटे विद्यार्थियों ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित थीम पर मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं, जिसमें देश के हर राज्य की संस्कृति मंच पर जीवंत हो उठी।

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पूर्व छात्र शिवांक श्रीवास्तव बने मुख्य अतिथि

अभिव्यक्ति-2025 के दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण विद्यालय के पूर्व छात्र शिवांक श्रीवास्तव का मुख्य अतिथि के रूप में आगमन रहा। बच्चों में अपने ही विद्यालय के पूर्व छात्र को इस प्रतिष्ठित पद पर देखकर भारी उत्साह और प्रसन्नता थी।

मुख्य अतिथि का स्वागत सेंट जोसेफ समूह की संस्थापक अध्यक्ष श्रीमती पुष्पलता अग्रवाल, प्रबन्ध निदेशक अनिल अग्रवाल और निदेशक नम्रता अग्रवाल ने बुके, स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र प्रदान कर किया। इस अवसर पर शिवांक को पढ़ाने वाले शिक्षक भी मौजूद थे।

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नेतृत्व और सफलताओं पर वक्तव्य

संस्थापक अध्यक्ष श्रीमती पुष्पलता अग्रवाल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि, "प्रतिभाओं को पहचान कर उनको सही मंच देकर हीरे के रूप में तराशकर देश को प्रदान करना ही सेंट जोसेफ की विशेषता है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि "परिश्रम और अनुशासन का संगम ही सफलता का दूसरा नाम है।"

प्रबंध निदेशक अनिल अग्रवाल ने बताया कि शिवांक आरंभ से ही एक परिश्रमी, प्रतिभाशाली और अनुशासित विद्यार्थी रहे, जिन्होंने यूपीएससी क्रैक कर सीएपीएफ में अधिकारी बनकर पूरे विद्यालय परिवार को गर्व का अवसर दिया है।

मुख्य अतिथि शिवांक श्रीवास्तव ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने गुरुजनों को दिया, और कहा कि "विद्यार्थियों की क्षमताओं को सही मार्गदर्शन देना सेंट जोसेफ की विशेषता है" तथा इस मुकाम तक पहुँचने में सेंट जोसेफ का बड़ा योगदान है।

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सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में दिखा 'समन्वय'

कार्यक्रम का आरंभ श्री गणेश वन्दना से हुआ। इसके बाद छोटे बच्चों ने महाराष्ट्र, असम, हरियाणा, पंजाब, कश्मीर, गुजरात, उत्तराखंड, बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु आदि राज्यों की सांस्कृतिक विधाओं को रंगारंग कार्यक्रमों के माध्यम से साकार किया। उनकी प्रतिभा को देखकर उपस्थित सभी अभिभावकों और स्थानीय निवासियों ने भूरी-भूरी सराहना की।

कार्यक्रम का समापन भव्य 'ग्रैंड फिनाले: मिले सुर मेरा तुम्हारा' के साथ हुआ। अंत में, राजाजीपुरम् शाखा की प्रधानाचार्या ने मुख्य अतिथि, अन्य गणमान्य अतिथियों और अभिभावकों के आगमन के प्रति धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया।

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