भारत का डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन FY2026 में 23.40 लाख करोड़ रुपये पार, फिर भी लक्ष्य से पीछे
वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह (Direct Tax Collection) 5.12 प्रतिशत बढ़कर 23.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। हालांकि यह आंकड़ा सरकार द्वारा तय संशोधित बजटीय लक्ष्य से कम रहा। Central Board of Direct Taxes द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, FY2026 के लिए सरकार ने 24.21 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर संग्रह का संशोधित अनुमान रखा था।
कॉर्पोरेट और पर्सनल टैक्स से कितनी कमाई हुई?
- शुद्ध कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन: 10.99 लाख करोड़ रुपये
- व्यक्तिगत आयकर (STT सहित): लगभग 12.41 लाख करोड़ रुपये
कुल मिलाकर शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 23.40 लाख करोड़ रुपये रहा, जो FY2025 के 22.26 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 5.12% अधिक है।
रिफंड जारी करने में कमी
FY2026 में टैक्स रिफंड जारी करने की राशि 1.09 प्रतिशत घटकर 4.71 लाख करोड़ रुपये रह गई। वहीं सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह करीब 28.12 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 4.03 प्रतिशत ज्यादा है।
क्या होता है डायरेक्ट टैक्स?
डायरेक्ट टैक्स यानी प्रत्यक्ष कर वह टैक्स होता है, जो सीधे व्यक्ति या संस्था की आय अथवा संपत्ति पर लगाया जाता है। इसमें:
- आयकर (Income Tax)
- कॉर्पोरेट टैक्स (Corporate Tax)
जैसे कर शामिल होते हैं।
इस व्यवस्था में टैक्स का भुगतान उसी व्यक्ति या संस्था को करना होता है, जिस पर कर लगाया गया है। इसमें किसी मध्यस्थ की भूमिका नहीं होती।
प्रोग्रेसिव टैक्स सिस्टम क्या है?
भारत का डायरेक्ट टैक्स सिस्टम “प्रोग्रेसिव” मॉडल पर आधारित है। यानी:
- अधिक आय वालों को ज्यादा टैक्स देना पड़ता है
- कम आय वालों पर कम टैक्स लगाया जाता है
अगर कोई व्यक्ति समय पर टैक्स नहीं भरता, तो उस पर ब्याज, जुर्माना और गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
