बलरामपुर नगर पालिका के 155वें स्थापना दिवस पर अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन देशभक्ति, हास्य और गीतों की त्रिवेणी में डूबे श्रोता

International Poets' Gathering on the 155th Foundation Day of Balrampur Municipality: Audience Immersed in a Confluence of Patriotism, Humor, and Melodic Songs.
 
बलरामपुर नगर पालिका के 155वें स्थापना दिवस पर अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन देशभक्ति, हास्य और गीतों की त्रिवेणी में डूबे श्रोता

बलरामपुर। ऐतिहासिक नगरी बलरामपुर की आदर्श नगर पालिका परिषद के 155वें स्थापना दिवस के मौके पर एक ऐतिहासिक और भव्य सांस्कृतिक शाम का आयोजन किया गया। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. धीरेन्द्र प्रताप सिंह 'धीरू' की अनूठी पहल पर आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। भीषण ठंड और शीतलहर के बावजूद, साहित्य और कला के कद्रदानों का उत्साह कम नहीं हुआ और हज़ारों की तादाद में मौजूद श्रोता देर रात तक तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कवियों की हौसलाअफजाई करते रहे।

भव्य शुभारंभ और विभूतियों का सम्मान

कार्यक्रम का आगाज़ मुख्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सरस्वती वंदना से हुआ।

  • प्रतिभाओं का आदर: इस ऐतिहासिक अवसर पर बलरामपुर के विकास, शिक्षा, संस्कृति और समाज सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाली स्थानीय प्रतिभाओं और गणमान्य नागरिकों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

  • अध्यक्ष का संदेश: नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. धीरेन्द्र प्रताप सिंह 'धीरू' ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नगर पालिका का यह 155 वर्षों का गौरवशाली सफर बलरामपुर की जनता के अटूट विश्वास और सहयोग की बदौलत ही संभव हो सका है।

pppp

जब राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सरोकार के गीतों से गूंजा पंडाल

सम्मान समारोह के बाद शुरू हुए काव्य पाठ में देश-विदेश से आए नामचीन साहित्यकारों ने अपनी कालजयी रचनाओं से समां बांध दिया:

1. प्रेम और सामाजिक सौहार्द का संदेश

बाराबंकी से आए मशहूर शायर विकास बौखल ने अपनी मखमली आवाज़ में प्रेम और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। वहीं, कवयित्री मणिका दुबे ने रिश्तों की अहमियत और सामाजिक संवेदनाओं को अपनी सुरीली कविताओं के माध्यम से पिरोकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

2. ओज और देशभक्ति की हुंकार

फरीदाबाद के विख्यात ओज कवि दिनेश रघुवंशी और युवा कवि अभय निर्भीक ने जब मंच संभाला, तो पूरा माहौल राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया। सीमाओं पर डटे जवानों और खेतों में पसीना बहाते किसानों के सम्मान में पढ़ी गई उनकी ओजस्वी पंक्तियों पर पूरा पंडाल 'भारत माता की जय' के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठा।

3. विसंगतियों पर करारा व्यंग्य

समाज के दोहरे चरित्र और समसामयिक विसंगतियों पर कटाक्ष करते हुए कवि मनोज मिश्र 'कप्तान' और कुंवर जावेद ने अपने तीखे व्यंग्य बाणों से श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया। वहीं, कवि सुरेश सैनिक और आदर्श त्रिपाठी ने अपनी दार्शनिक रचनाओं से जीवन में सकारात्मकता की अलख जगाई।

4. गंगा-जमुनी तहज़ीब की खुशबू

स्थानीय और राष्ट्रीय पटल पर बलरामपुर का नाम रोशन करने वाले रचनाकारों— रुखसार बलरामपुरी, डॉ. कलीम कैसर, डॉ. ओम प्रकाश मिश्र 'प्रकाश' और अकमल बलरामपुरी ने अपनी ग़ज़लों और गीतों के ज़रिये देश की अखंडता तथा कौमी एकता का पैगाम दिया, जिसे जनता ने खूब सराहा।

opp

हास्य के ठहाकों के साथ हुआ समापन

काव्य संध्या के अंतिम पड़ाव पर सुप्रसिद्ध हास्य कवि विनोद कलहंस ने मोर्चा संभाला। उन्होंने अपने चिर-परिचित चुटीले अंदाज़ और हास्य से भरपूर प्रस्तुतियों के ज़रिये प्रेम के खट्टे-मीठे अनुभवों को इस तरह बयां किया कि पूरा पंडाल ठहाकों और तालियों से गूंज उठा। देर रात तक चले इस गरिमामयी और भव्य आयोजन ने न केवल बलरामपुर के लोगों का भरपूर मनोरंजन किया, बल्कि समाज को एकजुटता और सकारात्मकता का एक बड़ा संदेश भी दिया।

Tags