International Yoga Day 2026: "महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि कोंडर को घोषित किया जाए राष्ट्रीय योग तीर्थ"; स्वामी भगवदाचार्य ने उठाई 'पतंजलि एक्सप्रेस' और ग्लोबल यूनिवर्सिटी की मांग
लखनऊ डेस्क (18 जून 2026):
आगामी 21 जून 2026 को पूरे विश्व में 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' की धूम रहने वाली है। इस वैश्विक उत्सव के बीच, योग के प्रणेता महर्षि पतंजलि की पावन जन्मस्थली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि 'पतंजलिपुरी कोंडर' को एक वैश्विक योग तीर्थ और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए सनातन धर्म परिषद और श्री पतंजलि जन्मभूमि न्यास ने सरकार से बड़ी मांगें की हैं।
राजधानी लखनऊ में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान प्रसिद्ध वेदांती डॉ. स्वामी भगवदाचार्य ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार सहित समाज के प्रबुद्ध वर्गों से इस पवित्र स्थल के समग्र विकास में सहयोग करने का पुरजोर आग्रह किया।
महर्षि पतंजलि: मानवता की अमूल्य धरोहर
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. स्वामी भगवदाचार्य ने कहा कि महर्षि पतंजलि केवल भारत के ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की सांस्कृतिक धरोहर हैं। उन्होंने कहासंस्कृत व्याकरण के महान आचार्य, आयुर्वेद के ज्ञाता और भारतीय ज्ञान परंपरा के अमर पुरोधा महर्षि पतंजलि ने अपने 'योग दर्शन' के माध्यम से पूरी दुनिया को स्वस्थ जीवन और आत्मिक उन्नति का मार्ग दिखाया है। आज यह हमारे देश और विशेषकर गोंडा जिले के लिए गौरव की बात है कि उनकी जन्मस्थली हमारे बीच है। अब समय आ गया है कि इस भूमि को वह वैश्विक सम्मान और पहचान मिले, जिसकी यह हकदार है।"
सरकार के समक्ष रखी गईं 5 मुख्य मांगें:
सनातन धर्म परिषद और श्री पतंजलि जन्मभूमि न्यास ने महर्षि पतंजलि जन्मभूमि कोंडर के विकास के लिए सरकार के सामने निम्नलिखित प्रस्ताव और मांगें रखी हैं:
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राष्ट्रीय योग तीर्थ का दर्जा: महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि कोंडर को आधिकारिक रूप से 'राष्ट्रीय योग तीर्थ' और एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थल घोषित किया जाए।
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अंतरराष्ट्रीय योग विश्वविद्यालय: महर्षि पतंजलि के सम्मान और योग पर उच्च शिक्षा के लिए कोंडर में एक 'महर्षि पतंजलि अंतरराष्ट्रीय योग विश्वविद्यालय' की स्थापना की जाए।
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'पतंजलि एक्सप्रेस' ट्रेन की शुरुआत: देश-विदेश से आने वाले योग साधकों और पर्यटकों की सुगमता के लिए देश की राजधानी दिल्ली से गोंडा होते हुए 'पतंजलि एक्सप्रेस' ट्रेन का संचालन शुरू किया जाए।
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वैश्विक शोध और अध्ययन केंद्र: यहाँ पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक योग एवं शोध केंद्र (Research Centre) तथा महर्षि पतंजलि के जीवन व कृतित्व पर आधारित एक अत्याधुनिक संग्रहालय (Museum) स्थापित किया जाए।
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आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज: क्षेत्र में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग के सहयोग से आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज की स्थापना का प्रयास अंतिम चरण में है, जिसका भवन निर्माण भी पूरा हो चुका है।
सांस्कृतिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान
स्वामी भगवदाचार्य ने जोर देकर कहा कि योग के इस वैश्विक दौर में महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि का संरक्षण, संवर्धन और विकास करना हम सभी की सामूहिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। यदि सरकार इन मांगों को पूरा करती है, तो गोंडा का यह क्षेत्र न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए योग, अध्यात्म और शोध का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
