International Yoga Day 2026: 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और वैश्विक कल्याण का आधार है भारतीय योग; जानिए 21 जून का विशेष महत्व

International Yoga Day 2026: Indian Yoga is the foundation of 'Vasudhaiva Kutumbakam' and global well-being; discover the special significance of June 21.
 
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विशेष आलेख — गोविंद सिंह राजपूत (20 जून 2026):  वर्तमान समय में मानव सभ्यता अभूतपूर्व वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के दौर से गुजर रही है। इस विकास ने हमारे भौतिक जीवन को सुविधाजनक तो बनाया है, लेकिन इसके साथ ही तनाव, अवसाद, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी मानसिक व शारीरिक बीमारियां भी तेजी से बढ़ी हैं। भौतिक सुख-सुविधाओं की इस अंधी दौड़ में मनुष्य खुद से और अपनी आंतरिक चेतना से दूर होता जा रहा है।

ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में, भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति से निकला 'योग' केवल एक शारीरिक कसरत नहीं, बल्कि संतुलित, स्वस्थ और सार्थक जीवन जीने का एक प्रामाणिक वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक मार्ग बनकर उभरा है। यही कारण है कि आज योग भारत की भौगोलिक सीमाओं को लांघकर संपूर्ण विश्व के लिए कल्याण, शांति और वैश्विक समरसता का सबसे बड़ा संदेशवाहक बन चुका है।

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संस्कृत की 'युज' धातु से महर्षि पतंजलि के 'योगसूत्र' तक

योग का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है, जिसे भारतीय ऋषियों और मनीषियों ने अपनी गहन साधना और व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर विकसित किया था।

  • शब्द का अर्थ: योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत की “युज” धातु से हुई है, जिसका सीधा अर्थ होता है—जोड़ना, मिलाना या एकीकरण करना।

  • मूल उद्देश्य: इसका वास्तविक उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा के बीच एक आदर्श सामंजस्य स्थापित करना है।

  • आधार ग्रंथ: महान दार्शनिक महर्षि पतंजलि द्वारा रचित 'योगसूत्र' को योग दर्शन का आधार स्तंभ माना जाता है, जो मनुष्य को बाहरी संसार की भागदौड़ से निकालकर उसके अंतर्मन से जोड़ता है।

2014 की ऐतिहासिक पहल और वैश्विक स्वीकार्यता

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत भारत के दूरदर्शी प्रयासों का परिणाम है। वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत के प्रधानमंत्री ने योग को मानवता की अमूल्य धरोहर बताते हुए इसके लिए एक विशेष वैश्विक दिवस घोषित करने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को दुनिया भर के देशों का अभूतपूर्व समर्थन मिला। परिणामस्वरूप, 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिवर्ष 21 जून को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' के रूप में मनाने की ऐतिहासिक घोषणा की। यह भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ज्ञान की वैश्विक स्वीकार्यता का एक गौरवशाली क्षण था।

आखिर 21 जून ही क्यों? जानिए इसका वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व

21 जून को इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए चुने जाने के पीछे एक गहरा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण है:

  1. ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice): 21 जून वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'ग्रीष्म अयनांत' कहा जाता है।

  2. ऊर्जा का संवर्धन: भारतीय आध्यात्मिक और खगोलीय परंपरा में इस कालखंड को मानवीय चेतना के विकास, सकारात्मक ऊर्जा के संवर्धन और आत्मज्ञान के लिए अत्यंत पवित्र व महत्वपूर्ण माना गया है।

आधुनिक शोधों ने भी यह साबित किया है कि नियमित योगाभ्यास से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ती है, रक्त संचार संतुलित होता है और मानसिक तनाव का स्तर तेजी से कम होता है। कोरोना महामारी के संकट काल में भी योग और प्राणायाम ने दुनिया भर के करोड़ों लोगों को मानसिक अवसाद से उबारने में रीढ़ की हड्डी का काम किया था।

'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना का विस्तार

भारत की मूल संस्कृति हमेशा से “वसुधैव कुटुम्बकम्” (अर्थात् संपूर्ण विश्व ही मेरा परिवार है) के सिद्धांत पर टिकी रही है। योग इसी वैश्विक भाईचारे की भावना का व्यावहारिक विस्तार है। योग किसी जाति, धर्म, संप्रदाय या देश विशेष की सीमाओं में नहीं बंधा है, बल्कि यह पूरी मानवता के सार्वभौमिक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। आज जब दुनिया युद्ध, हिंसा, वैचारिक तनाव, पर्यावरणीय संकट और सामाजिक विघटन से जूझ रही है, तब योग वैश्विक मंच पर शांति, सह-अस्तित्व और संतुलन का सबसे सशक्त माध्यम बनकर दिखाई देता है।

राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम

एक 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने में भी योग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी उसके स्वस्थ और जागरूक नागरिक होते हैं। यदि हमारा समाज शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से सुदृढ़ होगा, तो देश स्वतः ही प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा। इसलिए योग केवल एक व्यक्तिगत साधना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक राष्ट्रव्यापी अभियान है।

अब समय आ गया है कि योग को केवल 21 जून के एक दिवसीय आयोजन तक सीमित न रखकर, इसे अपनी दैनिक जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए। आइए, इस अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हम सब संकल्प लें कि हम योग को अपनाएंगे और एक स्वस्थ, समृद्ध और निरोगी विश्व के निर्माण में अपना योगदान देंगे। क्योंकि "करें योग, रहें निरोग" केवल एक नारा नहीं, बल्कि मानवता के उज्ज्वल भविष्य का आधार है।

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